डीएनए हिंदीः टाइप 2 डायबिटीज अपर्याप्त इंसुलिन उत्पादन के कारण होता है और इंसुलिन के ब्लड में सही तरीके से न पहुंचने से ब्लड में शुगर का लेवल हाई हो जाता है. लेकिन अच्छी बात ये है कि टाइप-2 डायबिटीज को डाइट कंट्रोल करके और कुछ खास चीजों को खाने से आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है.
प्लांट बेस्ड हेल्थ प्रोफेशनल्स के डायबिटीज विशेषज्ञ क्लेयर लिंच बताते हैं की ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए प्लांट बेस 3 चीजें अगर साथ में खाई जाएं तो शुगर कभी नहीं बढ़ेगा और डायबिटीज को कंट्रोल करने में ये तीन चीजें चमत्कारिक रूप से असर दिखाती है. क्योंकि ये हाई फाइबर के साथ कम कैलोरी वाली होती हैं और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण ही ये डायबिटीज रोगियों के लिए बेस्ट डाइट होती है.
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लिंच बताते हैं की फाइबर को हमारे आंत रोगाणुओं द्वारा किण्वित और पचाया जाता है और यह प्रक्रिया शॉर्ट चेन फैटी एसिड (एससीएफए) पैदा करती है जो भोजन के बाद रक्त ग्लूकोज स्पाइक्स को कम करने के लिए जानी जाती है.
इनमें से कुछ एससीएफए आपके रक्त में वसा को भी कम करते हैं जो इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है और वे अग्न्याशय में कोशिकाओं के कार्य को सुधारते हैं जो इंसुलिन बनाते हैं.
यदि आप जागरूक नहीं हैं तो इंसुलिन प्रतिरोध तब होता है जब आपकी कोशिकाएं इंसुलिन को अच्छी प्रतिक्रिया नहीं देती हैं और आसानी से आपके ब्लड में नहीं ले पाती हैं. लेकिन जब आप इन तीन फाइबर से भरी चीजें साथ में लेते हैं तो आपके ब्लड में इंसुलिन नेचुरल तरीके से पहुंचने लगता है. तो चलिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के अनुसार जाने ये 3 चीजे हैं क्या?
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टोफू और सोया प्रोटीन
सोया प्रोटीन डायबिटीज के जोखिम और रोकथाम के लिए फायदेमंद है. खास बात ये है कि सोया प्रोटीन में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है और 'अच्छे' पॉलीअनसेचुरेटेड वसा और फ्लेवोनोइड्स होते है जो अपने एंटीऑक्सिडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरे होने के कारण डायबिटीज के जोखिम को कम करता है, जिससे रक्त शर्करा और इंसुलिन प्रतिरोध में सुधार होता है. टोफू से लेकर सोया दूध और सोयाबीन से लेकर टेम्पेह तक आप कुछ भी रोज खाना शुरू कर दें.
फलियां (बीन्स, दाल और छोले)
लिंच बताते हैं कि टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में फली का लगातार सेवन बेहतर रक्त शर्करा नियंत्रण के लिए जाना जाता है. ये फलियां घुलनशील और अघुलनशील फाइबर के हाई सोर्स होती हैं.
घुलनशील फाइबर को आंत में फाइबर के गेलिंग प्रभाव के कारण भोजन के बाद रक्त शर्करा को कम करने में काम करती हैं, जबकि अघुलनशील फाइबर को इंसुलिन संवेदनशीलता को कंट्रोल के लिए जाना जाता है. इसलिए रोज डाइट में अलग-अलग तरह की फलियां जरूर लें.
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बेरीज
इंसुलिन संवेदनशीलता पर लाल, बैगनी या भूरी बेरीज बहुत काम करती हैं. इसमें फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट के साथ एंटी डायबिटीज गुण भरे होते हैं. इसलिए एक कम से कम 100 ग्राम इसे रोज लेना शुरू कर दें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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