हिंदू धर्म में तीनों लोकों के बीच शांति स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह एक प्रकार की पूजा है जो चौथे बच्चे के पैदा होने पर की जानी चाहिए. त्रिखल में शांति स्थापित न होने से कई समस्याएं पैदा होंगी. व्यक्ति के जीवन में आर्थिक तंगी, बीमारी और कई अन्य समस्याओं के कारण जीवन कठिन हो जाता है.
जीवन में सुख, समृद्धि, कल्याण और धन वृद्धि के लिए इस शांति को प्राप्त करना बहुत जरूरी है. इससे जीवन में चल रही परेशानियों से राहत मिलती है. तीन बच्चों के बाद चौथा बच्चा होने पर त्रिखल दोष उत्पन्न होता है.
दम्पति के जीवन में परेशानियां आती रहती हैं
जिन लोगों को तीन बेटियों के बाद बेटा या तीन बेटों के बाद बेटी होती है, उन्हें त्रिखल शांति जरूर करवानी चाहिए. वैदिक पंचांग और हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में त्रिखल का विस्तार से वर्णन किया गया है. त्रिखल शांति न करने से दम्पति के जीवन में स्वास्थ्य, वित्त और संतान से संबंधित कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं.
बच्चों से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं
चौथा बच्चा होता है तो उनके लिए त्रिखल शांति कराना अनिवार्य है क्योंकि ऐसा न करने से संतान संबंधी समस्याएं, स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं, बच्चे की प्रगति में रुकावट और दैनिक जीवन में समस्याएं कभी खत्म नहीं होती हैं. हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस तरह से बच्चों का जन्म होना दंपत्ति के लिए बहुत अशुभ माना जाता है.
इस त्रिखल शांति को करने का मुख्य कारण यह है कि जीवन में आने वाली समस्याएं और संतान से संबंधित दुख समाप्त हो जाते हैं. यह त्रिखल शांति केवल विद्वान पंडित द्वारा ही की जानी चाहिए. इसके लिए हवन यज्ञ, पूजन और दान का महत्व बताया गया है.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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तीसरे बच्चे के होने पर कौन सी पूजा जरूरी होती है?
चौथे बच्चे के जन्म लेते ही करानी चाहिये ये पूजा, वरना लगता है त्रिखल दोष