हाल ही में आंध्र प्रदेश में बर्ड फ्लू के एक दुखद मामले ने सभी को हिलाकर रख दिया. इस खतरनाक बीमारी की वजह से 2 साल की मासूम बच्ची की जान चली गई. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इस बच्ची ने कच्चा चिकन खाया था जिसकी वजह से वह बर्ड फ्लू से संक्रमित हो गई. यह घटना बर्ड फ्लू के खतरे और बच्चों पर इसके संभावित गंभीर प्रभावों को उजागर कर रही है. ऐसे में माता-पिता के लिए इस बीमारी के लक्षणों को जानना और अपने बच्चों को इससे बचाने के तरीकों के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी है. आइए यहां जानते हैं कि बर्ड फ्लू क्या है और इससे बच्चों को कैसे बचाया जा सकता है.
बर्ड फ्लू क्या है
बर्ड फ्लू, जिसे एवियन इन्फ्लूएंजा के नाम से भी जाना जाता है, एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है. यह वायरस मनुष्यों में भी फैल सकता है, खासकर उन लोगों में जो संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आते हैं. बच्चों को भी बर्ड फ्लू का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि वे अक्सर अपनी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं जिससे उन्हें संक्रमित पक्षियों या दूषित सतहों के संपर्क में आने की अधिक संभावना होती है. अमेरिका से लेकर भारत तक, कई देशों में बर्ड फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं.
बर्ड फ्लू के लक्षण
- तेज बुखार
- खांसी
- गले में खराश
- नाक बहना या बंद होना
- मांसपेशियों या शरीर में दर्द
- सिरदर्द
- थकान और कमजोरी
- गंभीर मामलों में सांस लेने में तकलीफ और निमोनिया भी हो सकता है.
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बच्चो को बर्ड फ्लू से बचाने के उपाय
पक्षियों से दूरी बनाएं
बच्चों को जंगली या बीमार दिखने वाले पक्षियों से दूर रहना सिखाएं. उन्हें पोल्ट्री या ऐसी जगहों पर जाने से रोकें जहां पक्षी बड़ी संख्या में हों.
हाथों की सफाई
बच्चों को नियमित रूप से और अच्छी तरह से हाथ धोने के महत्व के बारे में सिखाएं. उन्हें कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने के लिए प्रोत्साहित करें, खासकर पक्षियों या जानवरों को छूने के बाद, बाहर खेलने के बाद और खाने से पहले और बाद में.
पका हुआ भोजन खिलाएं
बच्चों को हमेशा अच्छी तरह पका हुआ चिकन, अंडे और अन्य पोल्ट्री प्रोडक्ट खिलाएं. सुनिश्चित करें कि अंडे की जर्दी और सफेद भाग ठोस हो. अधपके या कच्चे अंडे और मांस से बचें, क्योंकि उनमें बर्ड फ्लू वायरस हो सकता है.
साफ- सफाई का ध्यान रखें
बच्चों को अपनी आंखें, नाक और मुंह छूने से बचें, खासकर अगर उन्होंने अपने हाथ नहीं धोए हों. खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को टिशू या अपनी कोहनी से ढकने की आदत डालें.
बीमारी के लक्षणों पर ध्यान दें
अगर आपके बच्चे में बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में कठिनाई जैसे फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें, खासकर अहर वे हाल ही में पक्षियों या मुर्गियों के संपर्क में आए हों.
पोल्ट्री बाजारों से दूर रखें
अगर संभव हो तो अपने बच्चों को पोल्ट्री बाजार या ऐसे जगहों पर ले जाने से बचें जहां जिंदा पक्षी बेचे जाते हैं.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)
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