देश में 'एक राष्ट्र एक चुनाव' के मद्देनजर खूब चर्चा हो रही है. इसी क्रम में केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय ने चुानव से संबंधित एक समिति से आए सुझाव के संदर्भ मे अपनी बात रखी है. ये एक संयुक्त संसदीय (JPC) समिति है, जिसे लोकसभा और विधानसभाओं का चुनाव एक संग कराने से जुड़े दो विधेयकों की जांच के लिए गठित किया गया है. इस संयुक्त समिति के कुछ सदस्यों की ओर से बैलेट पेपर पर फिर से चुनाव कराने के पक्ष में सलाह दिए गए थे. इसके जवाब में कानून मंत्रालय ने कहा है कि बैलेट पेपर पर फिर से चुानव कराने का सवाल उसके अधिकार क्षेत्र का नहीं है.
कानून मंत्रालय ने रखी आपनी बात
कानून मंत्रालय के विधायी विभाग की ओर से पर्याप्त जवाब पेश किए गए हैं. संसदीय समिति ने चुनाव से संबंधित कई सारे सवाल उठाए थे. इसी क्रम में जवाब दिया गया है. बताया गया है कि 'बैलेट पेपर पर चुनाव कराने को लेकर सलाह देना संसदीय समिति के क्षेत्राधिकार के बाहर है.' साथ ही बताया गया कि 'वोटिंग को लेकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) या मतपत्र का इस्तेमाल वो मुद्दा नहीं जिसकी जांच समिति की ओर से की जा रही है.' कानून मंत्रालय की ओर से कहा गया कि 'केंद्र में होने वाले लोकसभा और प्रदेशों में होने वाले विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने से किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं आएगी. इसे किसी भी लिहाज से अलोकतांत्रिक और गैरसंवैधानिक नहीं करार दिया जा सकता है. साथ ही ये संघीय ढांचे के विरुद्ध भी नहीं है.'
पहले भी लागू हो चुका है 'एक राष्ट्र एक चुनाव'
साथ ही कानून मंत्रालय की ओर से कहा गया कि 'पहले भी केंद्र और राज्यों के चुनाव संग में होते रहे हैं, लेकिन समय के साथ ही कुछ प्रदेशों में राष्ट्रपति शासन की नौबत आने की वजह से ऐसा नहीं हो सका.' आपको बताते चलें कि साल 1951 से 1967 तक केंद्र में लोकसभा और राज्यों में विधानसभा के चुनाव एक संग हुए थे.
क्या है 'एक राष्ट्र, एक चुनाव'?
केंद्र सरकार की ओर 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को लेकर एक विचाराधीन प्रस्ताव लाया जा चुका है. इसके तहत एक तय समय सीमा के भीतर केंद्र और राज्यों में एक साथ चुनाव कराने की बात है. उसे वाले का उद्येश्य चुनाव में खर्च होने वाले राशि में कटौती करना है. केंद्र सरकार की ओर से इस विधेयक को 17 दिसंबर 2024 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था. इसी की जांच को लेकर एक जेपीसी का गठन किया गया है.
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क्या फिर से बैलेट पेपर पर होंगे चुनाव? कानून मंत्रालय ने संसदीय समिति को EVM पर दिया ये जवाब