यूपी के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में चल रही राजनीति किसी से छुपी नहीं है. चाहे वो सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हों. या फिर कांग्रेस विपक्ष की तरफ से लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं और रंग में भंग डालने का काम किया जा रहा है. प्रयागराज में चल रहे कुंभ की सफलता विरोधियों को किस हद तक चुभ रही हैं? इसका अंदाजा कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की उस बात से लगाया जा सकता है, जिसका यदि अवलोकन किया जाए तो साफ़ पता चलता है कि डीके बांटने वाली राजनीति कर लोगों को बरगलाने का काम कर रहे हैं.
ध्यान रहे कि कर्नाटक स्थित मैसूर के टी नरसीपुरा में त्रिवेणी संगम पर ऐतिहासिक कुंभ मेले का 13वां संस्करण आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है. उद्घाटन के साथ ही कर्नाटक में भव्य आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत हो गई है जिसे अक्सर दक्षिण भारत का प्रयागराज कुंभ कहा जाता है. इसमें राज्य भर से हजारों श्रद्धालु और संत शामिल होते हैं.
इस आयोजन में कई प्रमुख अनुष्ठान होते हैं. श्रद्धालु पवित्र स्नान, आध्यात्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं जिससे माहौल भक्तिमय या ये कहें कि आध्यात्मिक हो जाता है. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया और त्रिवेणी संगम जहां कावेरी, कपिला और स्पतिका सरोवर नदियां मिलती हैं, में पवित्र डुबकी लगाई.
इस दौरान डीके शिव कुमार ने एक सभा को संबोधित करते हुए कुछ ऐसा कह दिया जिससे विवाद हो गया और मामला बीजेपी बनाम कांग्रेस हो गया है.
भाव में बहकर क्या बोल बैठे डीके शिवकुमार
उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने श्रद्धालुओं से प्रयागराज की यात्रा करने के बजाय कर्नाटक में कुंभ मेले में भाग लेने पर विचार करने का आग्रह किया. मौके पर अपनी बात रखते हुए शिवकुमार ने कहा कि, 'अगर आप इतिहास की किताबों को देखें तो पाएंगे कि गंगा, यमुना और सरस्वती को जो दिव्यता और पवित्रता दी गई है, वही हमारी कावेरी नदी को भी दी गई है. इसलिए मैं यहां के लोगों से अनुरोध करता हूं कि वहां (महाकुंभ) जाकर कुछ गलत होने देने की जरूरत नहीं है.
डीके शिवकुमार ने इस बात का भी जिक्र किया कि वहां बहुत मुश्किल है, आप यहां आकर प्रार्थना कर सकते हैं. मेरा मानना है कि प्रयास से ज्यादा प्रार्थनाएं फल देती हैं, इसलिए मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे हमारे राज्य के कुंभ मेले की व्यवस्थाओं का लाभ उठाएं.'
विपक्ष को चुभ गई है डीके की बातें!
जैसा कि हम ऊपर ही इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि डीके शिवकुमार द्वारा कुंभ पर दिए गए बयान ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. विपक्ष के नेता आर अशोक ने शिवकुमार की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, 'मैं डीके शिवकुमार की सलाह का स्वागत करता हूं. बदले में, मैं पार्टी अध्यक्ष को सलाह देता हूं कि वे मल्लिकार्जुन खड़गे, उनके बेटे और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को भी पवित्र स्नान करने की सलाह दें.'
बताते चलें कि यह टिप्पणी शिवकुमार और अशोक के बीच प्रयागराज में कुंभ मेले में भाग लेने को लेकर राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में आई है. अशोक ने पहले शिवकुमार के धार्मिक आयोजन में भाग लेने के फैसले की आलोचना की थी और इसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की गरीबी और गंगा के बारे में हाल ही में की गई टिप्पणियों से जोड़ा था.
जवाब में शिवकुमार ने दृढ़ता से कहा कि कुंभ मेले में उनकी भागीदारी एक निजी मामला है और किसी को भी उनकी मान्यताओं पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है.
शिवकुमार ने अपने व्यक्तिगत कार्यों को चुनने के अधिकार का बचाव करते हुए कहा कि, 'आर अशोक को प्रधानमंत्री की आलोचना करने दीजिए, मेरी नहीं. मैं जाऊं या न जाऊं, यह मेरी निजी मान्यताओं और जीवन का मामला है. वह मुझसे सवाल क्यों कर रहे हैं? अगर प्रधानमंत्री या उनकी पार्टी के कोई नेता, जैसे कि गृह मंत्री, इस पर टिप्पणी करते हैं, तो मैं उनके प्रति जवाबदेह होऊंगा.'
अशोक ने इससे पहले सोशल मीडिया पर शिवकुमार पर कटाक्ष करते हुए पूछा था कि, 'जैसे ही @DKShivakumar गंगा में डुबकी लगाएंगे, क्या उनके सारे पाप धुल जाएंगे? जैसे ही KPCCअध्यक्ष @DKShivakumar कुंभ मेले में पवित्र स्नान करेंगे, क्या कर्नाटक में गरीबी खत्म हो जाएगी? क्या अब @खड़गे साहब इस पर सवाल नहीं उठाएंगे?
उनकी टिप्पणी में शिवकुमार की धार्मिक आयोजन में भागीदारी और खड़गे द्वारा भाजपा नेताओं की ऐसे अवसरों का प्रचार के लिए उपयोग करने की पिछली आलोचना के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश की गई थी.
हालांकि, शिवकुमार ने अशोक की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि गंगा, कावेरी और कृष्णा जैसी नदियां किसी की नहीं हैं और उनकी कोई सीमा नहीं है.
उन्होंने कहा कि,'पानी का कोई रंग, स्वाद या आकार नहीं होता और सभी को पानी की ज़रूरत होती है.' उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि धार्मिक प्रथाओं का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. डीके शिवकुमार ने कहा कि यह हमारे धर्म और कर्म, हमारी प्रथाओं, परंपराओं और मान्यताओं का मामला है.
शिवकुमार ने इस बात की पुष्टि की कि कुंभ मेले में उनकी यात्रा निजी थी, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि अशोक ने वहां मौजूद अन्य राजनीतिक हस्तियों के बजाय उन्हें क्यों निशाना बनाया.
सफाई देते हुए डीके शिवकुमार ने यह भी कहा कि, 'कुंभ में प्रधानमंत्री की भागीदारी पर अशोक को टिप्पणी करनी चाहिए, मुझ पर नहीं.' उन्होंने दोहराया कि उनकी भक्ति एक निजी मामला है, जिस पर राजनीतिक जांच नहीं होनी चाहिए.
बहरहाल जैसी डीके शिवकुमार की बातें हैं और उन बातों में जैसी टीस है, उसे देखकर इतना तो साफ़ हो गया है कि वो ये पचाने में असमर्थ हैं कि कैसे यूपी जैसे राज्य ने आस्था और आध्यात्मिकता के संगम में इतने लोगों को समाहित कर लिया?
बतौर राजनेता डीके शिवकुमार को इस बात को समझना होगा कि आस्था किसी दबाव में नहीं होती। उन्हें तो खुश होना चाहिए था कि जिस सनातन संस्कृति की बातें उनकी पार्टी के सर्वेसर्वा राहुल गांधी करते हैं उस सनातन संस्कृति केवाहक करोड़ों लोग तमाम जटिलताओं का सामना करते हुए प्रयागराज पहुंच रहे हैं और गंगा में स्नान कर रहे हैं.
खैर, हो सकता है अभी डीके शिवकुमार को अपने बयान का मतलब न पता हो. मगर उन्हें यह जरूर याद रखना चाहिए कि जनता कुछ भी नहीं भूलती. कुंभ पर बयान उन्हें और पार्टी को फायदा पहुंचाता है या नुकसान आगामी चुनावों में उन्हें और पार्टी को इसका पता चल जाएगा.
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महाकुंभ की आड़ में कर्नाटक की जगह 'नफरत' की ब्रांडिंग तो नहीं कर रहे डीके शिवकुमार?