रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब यह संघर्ष एक नए मोड़ पर आ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ हुई बैठक में जो चेतावनी दी है, उसने यूक्रेन की स्थिति को और भी जटिल बना दिया है. ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर यूक्रेन रूस के साथ समझौता नहीं करता, तो अमेरिका अपनी सैन्य सहायता वापस ले सकता है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर अमेरिका ने मदद रोक दी, तो क्या यूक्रेन अपनी लड़ाई जारी रख पाएगा?
अमेरिका की मदद का महत्व
यूक्रेन की सेना पिछले तीन सालों से अमेरिकी सैन्य सहायता के बलबूते पर लड़ाई लड़ रही है. जर्मनी स्थित थिंक टैंक कील इंस्टीट्यूट के अनुसार, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच अमेरिका ने यूक्रेन को करीब 119.7 अरब डॉलर की सहायता दी है. इसमें एडवांस हथियार सिस्टम, टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम और युद्ध प्रशिक्षण जैसी सहायता शामिल है. अगर अमेरिका अपनी मदद रोकता है, तो यूक्रेन की सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
यूक्रेन के पास बचे हथियार
- अभी भी यूक्रेन के पास अमेरिका और यूरोप से मिले कुछ हथियार मौजूद हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ATACMS मिसाइलें (अमेरिका) – रेंज: 300 किमी
- स्टॉर्म शैडो मिसाइलें (ब्रिटेन-फ्रांस) – रेंज: 250 किमी
- HIMARS (अमेरिका) – मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम
- M270 मिसाइल सिस्टम (ब्रिटेन) – लंबी दूरी की मारक क्षमता
हालांकि, इन हथियारों के लिए गोला-बारूद और मरम्मत की आवश्यकता होती है, जो अमेरिकी सप्लाई के बिना मुश्किल हो सकती है.
रूस की बढ़ती ताकत
रूस ने पिछले साल अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की है. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (IISS) के मुताबिक, 2024 में रूस का रक्षा बजट $145.9 अरब था, जो उसके GDP का 6.7% है. यह बजट यूरोपीय देशों के संयुक्त रक्षा बजट से कहीं ज्यादा है. ऐसे में रूस लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है और पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
अमेरिका के बिना क्या यूक्रेन लड़ाई जारी रख सकता है?
- अगर अमेरिका अपनी मदद वापस लेता है, तो यूक्रेन के पास कुछ विकल्प होंगे:
- यूरोपीय देशों से अतिरिक्त सहायता की मांग
- घरेलू हथियार उत्पादन को बढ़ावा देना
- नई सैन्य रणनीतियों को अपनाना
हालांकि, इन उपायों के बावजूद, अमेरिका जैसी तेज और बड़ी सैन्य सहायता की भरपाई कर पाना मुश्किल होगा. इससे युद्ध की दिशा बदल सकती है और रूस को बढ़त मिलने की संभावना बढ़ जाएगी.
यूरोप की भूमिका
यूरोप के देश जैसे जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन यूक्रेन को मदद देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उनकी सहायता अमेरिकी मदद के स्तर तक नहीं पहुंच सकती. यूरोपीय देशों के पास सीमित हथियार और उत्पादन क्षमता सीमित है. इसके अलावा, राजनीतिक असहमति भी यूरोप की एकजुटता को कमजोर कर सकती है, जिससे यूक्रेन की सैन्य क्षमता पर असर पड़ सकता है.
अमेरिकी सप्लाई के बिना यूक्रेन की सैन्य ताकत कमजोर यूक्रेन के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं. अगर अमेरिका अपनी सैन्य सहायता बंद करता है, तो यूक्रेन के लिए रूस के खिलाफ लड़ाई जारी रखना बेहद मुश्किल होगा. यूरोपीय देश सीमित मदद कर सकते हैं, लेकिन अमेरिकी सप्लाई के बिना यूक्रेन की सैन्य ताकत कमजोर पड़ सकती है. ऐसे में रूस की बढ़ती ताकत और अमेरिका की बदली हुई नीति इस युद्ध के भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है.
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