Most Poisonous Small Animal: किंग कोबरा को हम दुनिया के सबसे जहरीले जीवों में से एक मानते हैं, जिसके डंक से हाथी भी मर सकता है. किंग कोबरा का जहर एक बार में दो दर्जन लोगों को मौत की नींद सुला सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक नन्हें से जीव का जहर किंग कोबरा के शक्तिशाली जहर से भी ज्यादा जानलेवा होता है. महज एक माचिस की डिब्बी में समा जाने वाले इस नन्हें समुद्री जीव का जहर किंग कोबरा से 100 गुना ज्यादा जहरीला होता है और उसके काटने पर शायद ही आपको कहीं कोई इलाज मिल पाएगा. सबसे डरावनी बात ये है कि यह जीव बेहद नन्हा होने के साथ ही पारदर्शी भी होता है यानी समुद्री पानी में आप इसे पहचान ही नहीं पाएंगे और यह अपने डंक से आपको मौत के करीब धकेलकर गायब हो जाएगा. चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं.
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किंग कोबरा धरती पर पाए जाने वाले सबसे जहरीले जीवों में से एक है. किंग कोबरा औसतन 12 से 13 फीट लंबा होता है, लेकिन यह अपनी पूंछ पर शरीर का एक तिहाई हिस्सा हवा में उठा सकता है यानी यह आपकी ऊंचाई के बराबर खड़ा होकर आपकी आंखों में आंखे डाल सकता है. किंग कोबरा का जहर एक बार में 20 लोगों की जान ले सकता है.
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Science News की एक रिपोर्ट के मुताबिक, किंग कोबरा एक बार में डंसने पर 200 से 500 मिलीग्राम तक जहर शिकार के शरीर में छोड़ता है. किंग कोबरा का जहर न्यूरोटॉक्सिक होने के कारण शरीर के नर्वस सिस्टम को फेल कर देता है, जिससे दिल की धड़कन थमकर हार्ट फेल हो जाता है या लकवा मार जाता है. साथ ही बॉडी में इंटरनल ब्लड क्लॉटिंग होने लगती है. इसी कारण कहते हैं कि 'किंग कोबरा का काटा हुआ पानी भी नहीं मांगता' यानी वह इससे पहले ही मर जाता है.
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किंग कोबरा से भी 100 गुना ज्यादा जहरीला जीव इरुकांजी जेलीफिश (Irukandji Jellyfish) होती है, जो संभवत: दुनिया की सबसे जहरीली जीव है. इसके जहर का कोई इलाज नहीं है. यह दिखने में महज 1 सेंटीमीटर आकार की होती है और इसका शरीर पारदर्शी होता है यानी आपको इसके आरपार दिखाई देता है. इसी कारण पानी में इसकी मौजूदगी का पता ही नहीं चलता है और यह डंक मारकर शिकार को मौत के घाट उतार देती है.
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इरुकांजी जेलीफिश ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी समुद्री इलाकों में पाई जाती है, जहां समुद्री तटों पर पानी में घुसते समय इसका हमला होने की चेतावनी दी जाती है. वैसेयह गहरे समुद्र में मिलती है, लेकिन कई बार पानी के साथ बहकर तटों के किनारे रेत में भी पहुंच जाती है और वहां भी इसका हमला हो सकता है.
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इरुकांजी जेलीफिश के डंक मारने पर पीड़ित व्यक्ति के शरीर में 'इरुकांजी सिंड्रोम (Irukandji Syndrome)' बन जाता है. इस सिंड्रोम में तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द, शरीर में असहनीय दर्द और बेचैनी जैसे लक्षण दिखने लगते हैं. पीड़ित को अपनी नसों में अंदर से जलने जैसा अहसास होता है, जिससे भयंकर पीड़ा होती है. इसके जहर से हार्ट अटैक और ब्रेन हैमरेज तक हो सकता है, जिससे पीड़ित की मौत हो जाती है.
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इरुकांजी जेलीफिश को दो कारणों से बेहद खतरनाक माना जाता है, क्योंकि पहला तो इसकी समुद्र में मौजूदगी का पता लगना नामुमकिन जैसा होता है. पारदर्शी होने के कारण यह पानी में बिना दिखे तैराकी कर रहे लोगों को डंक का शिकार बना लेती है. दूसरा इसके डंक मारने से जो जहर शरीर में जाता है, उसका कोई एंटीडोट (Antidote) आज तक दुनिया में नहीं बन पाया है यानी आपको कोई इलाज नहीं मिल पाएगा. ऐसे में आपका जिंदा रहना पूरी तरह भगवान के हाथ में है.
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ऑस्ट्रेलियाई समुद्री तटों में तैराकी करने वालों को स्पेशिल स्टिंगर सूट पहनने की सलाह दी जाती है ताकि उन्हें इरुकांजी जेलीफिश का डंक उनके शरीर तक नहीं पहुंच सके. इसके बावजूद यदि आपको इस जेलीफिश के डंक मारने जैसे लक्षण महसूस हों तो तत्काल अस्पताल पहुंचे ताकि यथासंभव इलाज करके इसके जहर के असर को कम किया जा सके.
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इरुकांजी जेलीफिश महज 1 सेंटीमीटर की होती है, लेकिन समुद्री पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में इसकी अहम भूमिका होती है. यह छोटी मछलियों और प्लवकों की संख्या को कंट्रोल रखकर जैव विविधता बनाए रखती है.
Short Title
King Cobra से 100 गुना जहरीला है ये जीव, इसका काटा पानी नहीं मांगता