भारतीय मान्यताओं के अनुसार, विवाह एक पवित्र बंधन है जो भगवान का आशीर्वाद लाता है. विवाह समारोह में मंत्रोच्चार और पूजा का विशेष महत्व है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा मंदिर भी है जहां पति-पत्नी के साथ मिलकर पूजा करने से उनके रिश्ते में दरार आ सकती है? यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन शिमला के रामपुर में स्थित एक मंदिर के बारे में ऐसी ही मान्यता प्रचलित है. आइये जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यता के बारे में.
श्री कोटि माता मंदिर की अनोखी मान्यता:
समुद्र तल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर में देवी दुर्गा की मूर्ति है, जिसे श्री कोटि माता के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर पूरे क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध है. हालांकि, इस मंदिर की विशेष मान्यता है कि यहां पति-पत्नी को एक साथ पूजा नहीं करनी चाहिए. स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि कोई विवाहित जोड़ा इस मंदिर में एक साथ पूजा करता है, तो उनके जीवन में कोई अप्रिय घटना घट सकती है, जिसके कारण अंततः उनका अलगाव हो सकता है.
इस मान्यता के पीछे एक प्राचीन कथा है, जो कार्तिकेय और गणेश से जुड़ी है . पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने अपने दो पुत्रों कार्तिकेय और गणेश को ब्रह्मांड की परिक्रमा करने का आदेश दिया. कार्तिकेय तुरंत अपने वाहन मोर पर सवार होकर यात्रा पर निकल पड़े, जबकि गणेश के सामने समस्या यह थी कि उनका वाहन चूहा था, जो धीरे-धीरे चलता था. यदि वह इस परिक्रमा के लिए निकलता तो उसे अपने भाई की तुलना में अधिक समय लगता.
ऐसे में गणेश जी ने अपनी बुद्धिमता का परिचय देते हुए अपने माता-पिता (भगवान शिव और माता पार्वती) की परिक्रमा कर ली. भगवान शिव ने जब इसका कारण पूछा तो गणेश जी ने उत्तर दिया कि माता-पिता के चरणों में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया हुआ है, इसलिए उनकी परिक्रमा करने से संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा करने का फल प्राप्त होता है.
भगवान शिव गणेश की इस युक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया. लेकिन जब कार्तिकेय परिक्रमा पूरी करके लौटे और उन्हें पता चला कि उनके छोटे भाई का विवाह पहले ही हो चुका है, तो वे अत्यंत दुखी और क्रोधित हुए. इससे व्यथित होकर उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने का संकल्प लिया.
माता पार्वती का श्राप:
माता पार्वती भी कार्तिकेय के इस निर्णय से क्रोधित हो गईं और उन्होंने श्राप दिया कि जो भी विवाहित जोड़ा इस स्थान पर एक साथ पूजा करेगा, उनके वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ेगा.
इसी मान्यता के कारण यहां एक अनोखी परंपरा कायम है
माना जाता है कि इसी स्थान पर श्री कोटि माता का मंदिर स्थापित है. इस मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति उनकी पत्नियों के साथ स्थापित है, लेकिन देवी पार्वती के श्राप से बचने के लिए यहां कभी भी पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते हैं. पहले एक व्यक्ति पूजा करके मंदिर से बाहर आता है, फिर दूसरा व्यक्ति जाता है और पूजा करता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी स्थानीय लोग इस विश्वास का पालन करते हैं. यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और अनूठी परंपराओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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