हर व्यक्ति को एक अच्छे और आरामदायक घर की जरूरत होती है. लेकिन कभी-कभी बिना उचित जानकारी के घर खरीदना या उसमें रहना जीवन की परेशानियां बढ़ा सकता है. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का संबंध शनि और राहु से होता है. घर की दीवारें शनि का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि छत राहु का प्रतीक है. यदि घर का डिजाइन या दिशा सही नहीं है, तो इससे मानसिक, वित्तीय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
अक्सर लोग सोचते हैं कि वे सही दिशा और स्थान पर घर खरीद रहे हैं, लेकिन फिर भी पारिवारिक परेशानियां, बीमारियां, वित्तीय संकट और दुर्घटनाएं होती रहती हैं. इसके पीछे कई ज्योतिषीय और वास्तु संबंधी कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ अंशुल त्रिपाठी जानकारी दे रहे हैं.
'टी-पॉइंट' पर बना घर अशुभ क्यों माना जाता है?
सबसे पहले 'टी-पॉइंट' पर स्थित घरों के बारे में जानना जरूरी है. 'टी-पॉइंट' वह स्थान है जहां कोई सड़क या रास्ता किसी घर के ठीक सामने समाप्त होता है. ऐसे स्थानों पर बने घरों में रहने वाले लोगों को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
हमेशा वित्तीय कठिनाइयां रहती हैं
- परिवार के सदस्यों को मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
- कोर्ट-कचहरी और कानूनी मामलों में उलझने की संभावना अधिक है.
- परिवार के सदस्यों की प्रगति रुक जाती है और उन्हें संघर्ष करना पड़ता है.
- ऐसा इसलिए होता है क्योंकि 'टी-पॉइंट' पर स्थित घर बाहर से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा से सीधे प्रभावित होते हैं. सड़क से आने वाली सभी ऊर्जा, चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक, सीधे घर में प्रवेश करती है. इसीलिए ऐसे घरों में रहने वाले लोग कई तरह की परेशानियों से घिरे रहते हैं.
बंद सड़क या आखिरी घर को अशुभ क्यों माना जाता है?
यदि गली का आखिरी मकान आपका है तो इसे वास्तु और ज्योतिष के अनुसार अशुभ माना जाता है. ऐसे घर में रहने से व्यक्ति की प्रगति रुक जाती है.
इस प्रकार के घर में रहने में क्या समस्याएं हैं?
- बीमारी लंबे समय तक घर में रहती है और लोग जल्दी ठीक नहीं होते.
- धन के चैनल बंद हो गए हैं और वित्तीय संकट जारी है.
- परिवार के सदस्य मानसिक रूप से परेशान रहते हैं तथा पारस्परिक संबंधों में तनाव बढ़ता है.
- जब किसी व्यक्ति का निवास स्थान सड़क किनारे स्थित होता है, तो जीवन में उसकी प्रगति बाधित हो सकती है.
- वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में ऊर्जा का प्रवाह आवश्यक है, लेकिन बंद गली में यह संभव नहीं है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है.
अशुभ घर की पहचान कैसे करें?
क्षतिग्रस्त घर का मतलब है कि घर का कुछ हिस्सा टूटा हुआ है या असामान्य आकार का है, या घर में असंतुलन है. ऐसे घर में राहु और सूर्य का नकारात्मक प्रभाव अधिक होता है.
ऐसे घर में रहने से कई समस्याएं आती हैं.
- परिवार में कोई व्यक्ति गंभीर मानसिक या शारीरिक बीमारी से पीड़ित हो सकता है.
- परिवार के सदस्यों के जीवन में अस्थिरता रहती है.
- घर में रहने वाले लोगों का भाग्य कमजोर होता है और उनकी तरक्की में बाधाएं आती हैं.
- यदि घर का कोई कोना कटा हुआ या असमान बना हुआ हो तो इसका अशुभ प्रभाव पड़ता है. ऐसे घर में नकारात्मक ऊर्जा बहुत अधिक होती है, इसलिए घर में रहने वाले लोग हमेशा परेशानियों से घिरे रहते हैं.
अशुभ भावों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के उपाय
यदि आप किसी अशुभ घर में रहते हैं और वहां से निकलना संभव नहीं है तो आप कुछ उपाय करके इन बुरे प्रभावों को कम कर सकते हैं.
दरवाजे की चौखट के नीचे चांदी का तार: घर के मुख्य दरवाजे की चौखट के नीचे चांदी का तार रखें. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती.
हनुमानजी की मूर्ति: घर के मुख्य द्वार पर हनुमानजी की मूर्ति रखें और उनकी नियमित पूजा करें.
तीन धातुओं की अंगूठियां: परिवार के सदस्यों को तीन धातुओं की अंगूठियां पहनने की सलाह दी जाती है: सोना, चांदी और तांबा. इससे ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है.
चांदी की डिब्बी या सिक्का: घर में चावल को चांदी की डिब्बी में रखें. इससे राहु के नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं.
नियमित सफाई और पूजा: घर को साफ रखें और नियमित रूप से पूजा-पाठ करें, ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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