महाकुंभ मेले में एप्पल कंपनी की सह-संस्थापक लॉरेन पॉवेल ने हिंदू संस्कृति के अनुसार साध्वी दीक्षा ली है. स्वामी कैलाशानंद गिरि द्वारा अपने आचार्य शिविर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद पावेल को साध्वी दीक्षा दी गई. हालाँकि, इस बार महाकुंभ मेले के दौरान कुछ स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वह प्रयागराज में स्नान नहीं कर सकीं. तब स्वामी जी ने उन पर संगम जल छिड़क कर स्नान का वरदान दिया और अमृत स्नान का महत्व समझाया.
दुनिया की सबसे अमीर महिला लॉरेन ने स्वेच्छा से दीक्षा लेने के बाद गले में रुद्राक्षी की माला पहनकर साध्वी व्रत लिया . लॉरेन द्वारा दीक्षा लेने के बाद, उन्हें हिंदू परंपरा के अनुसार कमला नाम और अच्युता का गोत्र दिया गया. क्रिश्चियन धर्म छोड़कर लॉरेन ने हिंदू परंपरा के अनुसार, साध्वी बनने के बाद अपने नए नाम से जानी जाएंगी, लेकिन उनके गोत्र में बदलाव को खास तौर पर देखा जाता था. क्या हिंदू धर्म में गोत्र इतने महत्वपूर्ण हैं?
1. हिंदू धर्म में गोत्र का क्या महत्व है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार गोत्र ऋषि परंपरा से जुड़ा है. हम सभी ऋषि-मुनियों के वंशज माने जाते हैं. ऐसे में एक पौराणिक मान्यता है कि हम सभी ऋषि-मुनियों की संतान हैं. इसलिए हिंदू धर्म में प्रत्येक व्यक्ति को ऋषि-मुनि कहा जाता है. कुल या गोत्र प्रणाली प्राचीन काल से ही अस्तित्व में है. इसकी शुरुआत चार ऋषियों अंगिरा, कश्यप, वशिष्ठ और भृगु से हुई. बाद में जमदग्नि, अत्रि, विश्वामित्र और अगस्त्य भी शामिल हो गये. गोत्र को एक प्रकार के चिह्न के रूप में वर्णित किया जा सकता है जो किसी व्यक्ति के वंश को बताता है.
2. अगर आपका गोत्र एक ही है तो शादी क्यों नहीं करते?
गोत्र उन लोगों का एक समूह है जिनकी वंशावली समान होती है. ये लोग खून के रिश्ते से जुड़े हैं. यह रिश्ता पिता की ओर से जारी रहता है. लेकिन ये रिश्ता हमेशा के लिए नहीं रहेगा. सातवीं पीढ़ी तक के लोग ही एक गोत्र के माने जाते हैं. गोत्र से व्यक्ति के वंश का पता चलता है. ऐसे में कहा जाता है कि एक ही वंश के दो व्यक्ति शादी नहीं कर सकते. उनके बीच खून का रिश्ता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, यदि कोई पुरुष एक ही गोत्र की महिला से शादी करता है, तो उनकी संतान शारीरिक या मानसिक बीमारियों से पीड़ित हो सकती है. इसी कारण से एक ही गोत्र के पुरुष महिलाओं से शादी नहीं करते हैं. ये इसके वैज्ञानिक प्रमाण हैं. वैज्ञानिक तौर पर भी यह बात गलत साबित हो चुकी है.
प्राचीन काल से ही गोत्र के आधार पर किसी की सदियों पुरानी वंशावली का पता चलता था. यह जानकर उन्होंने एक ही गोत्र में विवाह करने की गलती से परहेज किया. यह एक स्वस्थ समाज बनाने में भी मदद करता है. पुराणों में बताया गया है कि प्रत्येक मनुष्य किसी न किसी ऋषि का वंशज है. इसलिए हिंदू धर्म में गोत्र परंपरा एक बहुत ही महत्वपूर्ण परंपरा है.
Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)
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साध्वी बन गईं एप्पल की को-संस्थापक
Apple की सह संस्थापक महाकुंभ में बन गईं साध्वी, दीक्षा के बाद लॉरेन पॉवेल का गोत्र क्यों बदल गया?