माघ मास की जया एकादशी व्रत शनिवार, 8 फरवरी को है. यह व्रत माघ शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है. इस वर्ष जया एकादशी के दिन रवि योग बन रहा है. इस व्रत को करने से भूत, प्रेत, पिशाच आदि से मुक्ति मिलती है. इसमें लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं. फिर अगले दिन स्नान और दान के बाद तर्पण किया जाता है. विष्णु पूजा के दौरान जया एकादशी की कथा सुननी चाहिए. जया एकादशी व्रत की कथा जानें.
जया एकादशी व्रत कथा
जया एकादशी व्रत की कथा पद्म पुराण में वर्णित है. एक बार युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से माघ शुक्ल एकादशी का महत्व समझाने का अनुरोध किया. इस पर भगवान कृष्ण ने कहा कि यह एकादशी भूत, प्रेत, पिशाच आदि के चंगुल से आत्माओं को मुक्त कराने वाली कही जाती है. भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है. उनकी कहानी इस प्रकार है-
देवताओं के राजा इंद्र सभी देवी-देवताओं के साथ स्वर्ग में सुखपूर्वक रहते थे. एक दिन वह अप्सराओं के साथ सुन्दरवन में गया. गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्पवती सहित अन्य गंधर्व भी उनके साथ गए. पुष्पवती माल्यवान को देखकर मोहित हो गई और माल्यवान भी पुष्पवती की सुंदरता पर मोहित हो गया. वे दोनों देवताओं के राजा इंद्र को प्रसन्न करने के लिए नाच-गा रहे थे. लेकिन इस दौरान वे एक दूसरे के प्रति प्रेम से आकर्षित हो गए, जिसे देवताओं के राजा इंद्र ने महसूस किया.
देवराज इन्द्र को लगा कि वे उनका अपमान कर रहे हैं. क्रोध में आकर उन्होंने माल्यवान और पुष्पवती को श्राप दिया कि तुम दोनों स्वर्ग से गिर जाओगे. तुम्हें पिशाच रूप में पृथ्वी पर अनेक प्रकार के कष्ट सहने पड़ेंगे. शाप के प्रभाव से माल्यवान और पुष्पवती हिमालय पहुँच गए. दोनों ने राक्षस का रूप धारण कर लिया और अनेक प्रकार के कष्टों से ग्रस्त होने लगे. उनका जीवन बहुत कष्टपूर्ण था.
माघ शुक्ल एकादशी का दिन आ गया है. उस दिन माल्यवान और पुष्पवती ने उपवास रखा और भोजन नहीं किया. दिनभर केवल फल और फूल खाकर बिताएं. सूरज डूबने पर दोनों एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए. मैं किसी तरह रात काट पाया. उस समय सर्दी का मौसम था और दोनों ठंड के कारण सो नहीं पा रहे थे. पूरी रात जागकर बिताई. अनजाने में ही दोनों ने जया एकादशी का व्रत कर लिया. भोर होते ही भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया और वे दोनों राक्षस योनि से मुक्त हो गये.
भगवान हरि की कृपा से उन दोनों को पहले से भी अधिक सुन्दर शरीर प्राप्त हुआ और वे स्वर्ग पहुँच गये. माल्यवान और पुष्पवती ने देवराज इन्द्र को प्रणाम किया. तब उन दोनों को देखकर इंद्र को आश्चर्य हुआ कि इन्हें राक्षस लोक से मुक्ति कैसे मिली? उसने उन दोनों से राक्षसों से मुक्ति पाने का उपाय पूछा. तब माल्यवान ने कहा कि यह सब जया एकादशी का प्रभाव है. श्री हरि विष्णु की कृपा से दोनों को राक्षस जाति से मुक्ति मिल गई.
जो लोग जया एकादशी का व्रत विधि-विधान से करते हैं, उन्हें मालवन और पुष्पावती का पुण्य भी प्राप्त होता है. अपने जीवन के अंत में, वह पिशाच, भूत या राक्षस का दर्जा प्राप्त नहीं करता है.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. ये जानकारी सामान्य रीतियों और मान्यताओं पर आधारित है.)
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जया एकादशी व्रत कथा
आज जया एकादशी पर पढ़ें ये ये पौराणिक कथा, तभी पूरी होगा व्रत