Chaitra Navratri 2025: हर साल चैत्र मास में चैत्र नवरात्रि मनाये जाते हैं. नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है. इस बार यह त्योहार 30 मार्च 2025 से लेकर 6 अप्रैल 2025 यानी नवमी तिथि तक मनाया जाएगा. नवरात्रि के पहले दिन माता रानी की घटस्थापना करने के साथ ही मिट्टी के बर्तन में जवारे बोने की परंपरा है. नौ दिनों की समाप्ति के बाद इन जवारों को पानी में विसर्जन कर दिया जाता है. इसकी एक विशेष तिथि और शुभ मुहूर्त और मंत्र होता है. आइए जानते हैं इस बार नवरात्रि पर किस दिन माता रानी जवारे विसर्जन किए जाएंगे. इसकी पूरी विधि से लेकर शुभ मुहूर्त और मंत्र...
चैत्र नवरात्रि 2025 जवारे विसर्जन की तारीख से लेकर शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 6 अप्रैल 2025 रविवार की शाम 7 बजकर 23 मिनट पर होगी. यह अगले दिन सोमवार को 8 बजे तक रहेगी. ऐसे उदयातिथि को देखते हुए जवारे विसर्जन 7 अप्रैल को किए जाएंगे. इस दिन कईं शुभ योग भी बन रहे हैं. इनमें जवारे विसर्जन करना बेहद शुभ होगा. इनमें सबसे पहला शुभ मुहूर्त सुबह 09 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. दूसरा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से शाम 3 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. तीसरा शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 7 मिनट से 6 बजकर 40 मिनट तक रहेगा.
यह है जवारे विसर्जन की विधि और मंत्र
जवारे विसर्जन नवरात्रि पर माता के नौ दिनों के बाद दशमी तिथि में किए जाएंगे. इनमें 7 अप्रैल 2025 सोमवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत पूजा का संकल्प लें. इसके बाद शुभ मुहूर्त में मां दुर्गा की पूजा अर्चना करें. माता रानी को कुमकुम से तिलक करें, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं. साथ ही अबीर, गुलाल, चावल, फूल आदि अर्पित करें. इसके बाद मंत्रों के साथ जवारों को पास के किसी भी बहते हुई नदी या तालाब में प्रवाह कर दें.
यह है जवारे विसर्जन मंत्र
रूपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवति देहि मे.
पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वान् कामांश्च देहि मे..
महिषघ्नि महामाये चामुण्डे मुण्डमालिनी.
आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि देवि नमोस्तु ते..
देवी की पूजा करने के बाद जवारों की भी चावल, फूल, कुमकुम से पूजा करें। जवारों को सिर पर रखकर शोभायात्रा निकालते हुए किसी नदी या तालाब तक लेकर जाएं. विसर्जन से पहले ये मंत्र बोलें-
गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि.
पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च..
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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नवरात्रि के बीच किस दिन करने चाहिए जवारे विसर्जन, जानें इसकी तिथि से लेकर विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त