भीष्म को स्वैच्छिक मृत्यु का वरदान उनके पिता से मिला था. और तब तक वह मृत्यु शैय्या पर रहे जब तक सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण नहीं हो गए. इस दौरान उन्होंने अर्जुन ही नहीं, युधिष्ठिर और अन्य लोगों को भी जीवन से जुड़ी कुछ बातें सिखाई थीं. उनकी शिक्षाओं के अनुसार हर मनुष्य में ये गुण होने चाहिए.
1. स्वच्छ एवं पवित्र मन
2. स्वयं के साथ और दूसरों के साथ सत्यनिष्ठा रखना
3. शांत रहें, क्रोध को हावी न होने दें.
4. कभी झूठ नहीं बोलना
5. बच्चों और पत्नी की उपेक्षा न करना
6. कभी अहंकारी न बनना
7. दूसरों का आदर करना
8. नौकरों एवं आश्रितों के साथ सहयोग करना.
9. क्षमा करना सीखना
इन चीजों से बना लें दूरी
आक्रामक: ऐसे लोग किसी भी बात को नकारात्मकता में बदल देते हैं और माहौल को गर्म कर देते हैं. ऐसे लोगों के आसपास शांति नहीं है.
आलस्य: यह नकारात्मकता का संकेत है और ऐसे लोगों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए. ऐसे लोग न केवल दूसरों की मदद करने से इंकार करते हैं, बल्कि वे स्वयं की मदद करने में भी असमर्थ होते हैं.
विश्वासघाती: ऐसे लोग केवल अपने बारे में ही सोचते हैं. वे समझते हैं कि इससे बड़ी कोई बात नहीं है.
घृणित एवं अनैतिक: ऐसे लोग नफरत और ईर्ष्या से भरे होते हैं. ये लोग इतने चालाक होते हैं कि दूसरों को धोखा देकर अपना काम निकलवाना चाहते हैं. ऐसे लोग नकारात्मकता और नफरत फैलाते हैं.
बहुत ज्यादा आसक्त होना : परिवर्तन जीवन की एक सतत प्रक्रिया है. जीवन की यात्रा में लोग आते हैं और जाते हैं. इसलिए किसी से भी ज्यादा मोह नहीं रखना चाहिए. प्रेम करना अच्छी बात है, लेकिन इस सत्य से अवगत रहें.
ये बातें भी बांध लें गांठ
चार प्रकार के मित्र जीवन में जरूर रखें
एक स्वाभाविक मित्र, एक समान उद्देश्य वाला मित्र, एक पारिवारिक मित्र, और एक बनावटी मित्र.
कड़ी मेहनत करने की आदत डालें
अपने और अपने परिवार की बेहतरी के लिए कड़ी मेहनत करें. कड़ी मेहनत करें और पैसा बचाएं ताकि आपका भविष्य अच्छा हो.
सभी की रक्षा करें
एक व्यक्ति को अपने परिवार, देश, खजाने, हथियारों, दोस्तों और अपने शहर की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए.
दयालु बनें
धर्म का सबसे बड़ा स्वरूप यह है कि प्रत्येक व्यक्ति जीवन, मनुष्य, भावनाओं, पीड़ितों और अन्य जीवित प्राणियों के प्रति दयालु हो. उसे हमेशा उनकी मदद करने और उन्हें हर मुसीबत से बचाने की कोशिश करनी चाहिए.
आशा या उम्मीद से बचें
आप दूसरों से जितनी अधिक अपेक्षा करेंगे, उतना ही अधिक निराश होंगे. इसलिए, संतुष्ट और शांतिपूर्वक जीवन जीने के लिए, किसी पर आशा नहीं रखनी चाहिए.
किसी को चोट न पहुंचाएं
किसी को भी शारीरिक या मानसिक रूप से नुकसान न पहुंचाएं. एक बार दिल टूट जाए तो उसे जोड़ा नहीं जा सकता. इसलिए सावधान रहें कि आपकी कही कोई बात किसी के दिल या दिमाग को ठेस न पहुंचाए.
सहनशील बनें
केवल धैर्य के माध्यम से ही इच्छाओं और प्रलोभनों पर विजय पाई जा सकती है.
स्वस्थ आहार खाएं
बीमारियों से दूर रहने के लिए स्वस्थ भोजन खाएं.
योग का अभ्यास करें
योग न केवल व्यक्ति को फिट रखता है, बल्कि यह भूख को भी नियंत्रित कर सकता है.
ज्ञान प्राप्त करते रहें
जो व्यक्ति स्वयं का अवलोकन करता है उसे निरंतर ज्ञान अर्जित करना चाहिए.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)
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