भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ी रही है. इसी कड़ी में इसरो अपने अंतरिक्ष डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पेडेक्स) के साथ ऐतिहासिक उपलब्धि के करीब पहुंच गई है. इसमें परीक्षण के तौर पर दो उपग्रहों को एक दूसरे से 3 मीटर की दूरी पर लाया गया. यह प्रयोग अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक में महारत हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और लूनर एस्ट्रोनॉट लैंडिंग जैसे भविष्य के मिशनों के लिए आवश्यक है.
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30 दिसंबर को PSLV C60 रॉकेट से लॉन्च किए गए दो उपग्रहों SDX01 (चेज़र) और SDX02 (टारगेट) को 230 मीटर की शुरुआती दूरी से हटाकर सिर्फ़ 3 मीटर की दूरी पर लाया गया. इसरो ने घोषणा की कि फाइनल डॉकिंग शुरू करने से पहले अलाइनमेंट और दूसरे मापदंडों का विश्लेषण करने के लिए उपग्रहों को फिर से सुरक्षित दूरी पर ले जाया गया.
इसरो ने क्या कहा
इसरो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, "15 मीटर और उसके बाद 3 मीटर तक पहुंचने का परीक्षण किया गया. अंतरिक्ष यान को सुरक्षित दूरी पर वापस ले जाया जा रहा है. डेटा का आगे विश्लेषण करने के बाद डॉकिंग प्रक्रिया पूरी की जाएगी." यह प्रयोग छोटे अंतरिक्ष यान का इस्तेमाल करके अंतरिक्ष में किफायती डॉकिंग तकनीक के प्रदर्शन में एक प्रमुख मील का पत्थर है. यह तकनीक असेंबलिंग स्पेस स्टेशन्स और डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन जैसे उन मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है जिनमें कई रॉकेट लॉन्च करने की जरूरत होती है.
SpaDeX Docking Update:
— ISRO (@isro) January 12, 2025
A trial attempt to reach up to 15 m and further to 3 m is done.
Moving back spacecrafts to safe distance
The docking process will be done after analysing data further.
Stay tuned for updates.#SpaDeX #ISRO
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इससे पहले स्पैडेक्स को कई बार रि-शेड्यूल किया गया है जिसमें 7 और 9 जनवरी के लिए शुरू किए गए डॉकिंग प्रयासों को ग्राउंड सिमुलेशन के माध्यम से महत्वपूर्ण मापदंडों को मान्य करने के लिए स्थगित कर दिया गया था. 8 जनवरी को इसरो ने उपग्रहों के बीच अपेक्षा से अधिक ड्रिफ्ट का पता लगाया और डॉकिंग में देरी करने का फैसला किया. चरणबद्ध तरीके से उपग्रहों को धीरे-धीरे करीब लाया गया. 11 जनवरी तक वे 230 मीटर की दूरी पर पहुंच गए और बाद में उन्हें 15 मीटर की दूरी पर ले जाया गया जिसे इसरो ने "एक्साइटिंग हैंडशेकिंग" कहा. उपग्रहों की प्रगति को दिखाते हुए उनके वीडियो और तस्वीरें जारी की गईं.आगे के एक्सपेरिमेंट में अंतरिक्ष यान 3 मीटर के भीतर पहुंच गया जो अंतिम डॉकिंग प्रक्रिया से पहले एक महत्वपूर्ण परीक्षण चरण था.
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क्या है इसरो का स्पेसडेक्स मिशन
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी सी60 रॉकेट से 220 किलोग्राम वजन वाले स्पैडेक्स उपग्रहों को लॉन्च किया गया. डॉकिंग प्रयोग करने के लिए उपग्रहों को 475 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में स्थापित किया गया. यह मिशन भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मॉड्यूलर अंतरिक्ष संरचनाओं के असेंबल के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को सक्षम करेगा और भविष्य के मानवयुक्त मिशनों के लिए ऑपरेशनल केपिबिलटी को बढ़ाएगा.
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