Yamuna Water Pollution: यमुना नदी का प्रदूषण लगातार चर्चा में है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद नदी की सफाई की कवायद शुरू की गई है. इससे पहले भी पिछले 30 साल में करीब 16,000 करोड़ रुपये यमुना नदी की सफाई पर खर्च हो चुके हैं. इसके बावजूद यमुना नदी के पानी की हालत ऐसी है कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 33 मॉनीटरिंग साइट्स में से 23 जगह इसके वाटर सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए हैं. इन जगहों पर यमुना के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य पाई गई है यानी नदी का पानी जिंदा जीवों के लिए जहर के बराबर है. इनमें दिल्ली की भी 7 मॉनीटरिंग साइट्स शामिल है. यह आंकड़ा जल संसाधनों की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसने अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की है.
STP नदी में उगल रहे सीधा नाले का पानी
संसदीय समिति की रिपोर्ट संसद में मंगलवार (11 मार्च) को पेश की गई है. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, संसदीय समिति ने दावा किया है कि यमुना नदी के प्रदूषण में सबसे बड़ी चिंता उसमें आने वाले नालों को लेकर जताई गई है. ऊपरी यमुना नदी सफाई परियोजना और नदी तल प्रबंधन पर दी गई रिपोर्ट में संसदीय समिति ने कहा है कि दिल्ली-उत्तर प्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट्स प्लांट्स (STP) बनाने का कोई लाभ नहीं हुआ है. पुराने STP भी अपग्रेड किए गए हैं. इसके बावजूद यमुना नदी में प्रदूषण का स्तर ऐसे खतरनाक स्तर पर है कि मानो इन STP से होकर नालों का पानी बिना ट्रीटमेंट के ही सीधे नदी में जा रहा है.
चार पैरामीटर पर जांचा गया नदी का जल
संसदीय समिति ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने जनवरी, 2021 से मई, 2023 के बीच यमुना नदी के पानी की 33 जगह जांच की थी. यह जांच राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ मिलकर चार पैरामीटर पर की गई. इन पैरामीटर में पानी में घुलित ऑक्सीजन (DO), पीएच वैल्यू, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और फेकल कोलीफॉर्म (FC) को आंकना था. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 33 में से दिल्ली की सभी 7 साइट्स साल 2021 में फेल हो गई, लेकिन साल 2022 और 2023 में पल्ला साइट पर थोड़ा सुधार दिखा. बाकी 6 साइट्स इन दोनों साल में भी पूरी तरह प्रदूषित दिखाई दीं. बाकी साइट्स में हरियाणा की भी सभी 6 मॉनीटरिंग साइट्स के सैंपल फेल हो गए, जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की 4-4 जगह के सैंपल मापदंडों पर खरे उतरे हैं.
नदी तल में जमा हुआ है खतरनाक मलबा, ड्रेजिंग कराना हो सकता है खतरनाक
दिल्ली दिल्ली सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग ने भी CSIR-नीरी के सहयोग से यमुना नदी के पानी पर एक स्टडी की है. इसमें यमुना नदी के तल में जमे मलबे को बेहद खतरनाक माना गया है. मानसून से पहले की गई स्टडी में पुराने लोहे के पुल, गीता कॉलोनी और डीएनडी पुल आदि के कीचड़ के सैंपल लिए गए, जिनमें भारी धातुएं खतरनाक मात्रा में मिली हैं. पैनल ने यमुना नदी का जहरीला कीचड़ हटाने के लिए कंट्रोल ड्रेजिंग की सिफारिश की है, जिसे राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने खतरनाक बताते हुए इससे नदी का तल अस्थिर होने की चिंता जाहिर की है.
यमुना नदी में नहीं छोड़ा जा रहा पर्याप्त पानी
संसदीय समिति ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि यमुना नदी में में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा जा रहा है, जो पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) बनाए रखने के लिए जरूरी है. बता दें कि 1994 में यमुना बेसिन राज्यों के बीच समझौता हुआ था, जिसमें हरियाणा में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए यमुना नदी में हथिनी कुंड बैराज से 10 क्यूमेक्स पानी छोड़ना अनिवार्य किया गया था. समिति ने इतने पानी को पर्यावरण के लिहाज से अपर्याप्त माना है. समिति का मानना है कि इसमें से अधिकांश पानी दिल्ली पहुंचने से पहले ही जमीन में रिस जाता है या वाष्पित हो जाता है. समिति ने इस प्रवाह को बढ़ाने की सलाह दी है.
यमुना के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण पर भी चिंता
संसदीय समिति ने यमुना नदी के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण पर भी चिंता जताई है. रिपोर्ट में दिल्ली-हरियाणा से इस अतिक्रमण की रिपोर्ट मिलने, जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूरा ब्योरा नहीं देने पर चिंता जताई गई है. समिति ने बताया कि दिल्ली में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने यमुना डूब क्षेत्रों के किनारे से करीब 477.79 हेक्टेयर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है, लेकिन लंबित कानूनी मुकदमों के कारण अब भी बहुत सारा इलाका अतिक्रमण से जूझ रहा है. यह भी यमुना के प्रदूषण का बड़ा कारण है.
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Delhi में प्रदूषण के कारण Yamuna River का हाल ऐसा हो जाता है. (फाइल फोटो)
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