Delhi Crime News: दिल्ली पुलिस के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है. दिल्ली पुलिस ने करीब दो साल की तलाश के बाद उस अपराधी को दबोच लिया है, जिसे करीब 20 साल पहले एक के बाद एक सीरियल किलिंग के लिए 'दिल्ली का कसाई (Butcher Of Delhi)' कहकर पुकारा गया था. चंद्रकांत झा नाम का यह आरोपी साल 2023 में जेल से 90 दिन की पैरोल लेकर बाहर आया था, लेकिन वापस जेल लौटने की बजाय वह फरार हो गया था. इसके बाद से ही पुलिस 57 सालके चंद्रकांत को तलाश कर रही थी और आखिरकार उसे दबोचने में पुलिस को सफलता हाथ लगी है.
2006-2007 में मचाया था आतंक
चंद्रकांत झा ने साल 2006 और 2007 के दौरान एक के बाद एक हत्याओं की झड़ी लगा दी थी. इन सीरियल किलिंग के चलते पूरी दिल्ली में खौफ फैला रहा था. हालांकि बाद में उसे दबोच लिया गया था. अदालत ने उसके भयानक जुर्मों को देखते हुए उसे मौत की सजा दी थी, लेकिन साल 2016 में उसकी अपील पर सजा को बदलकर उम्रकैद कर दिया गया था. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अक्टूबर, 2023 में उसने अच्छे चाल-चलन के आधार पर 90 दिन की पैरोल पर रिहाई मांगी थी, जिसे मंजूर कर लिया गया था. पैरोल के 90 दिन पूरे होने के बाद वह जेल में वापस ना लौटकर फरार हो गया था.
दिल्ली पुलिस ने रखा था 50,000 का इनाम
दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (क्राइम ब्रांच) संजय सेन ने मीडिया से कहा,'चंद्रकांत झा को पकड़ने के लिए 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था. इससे उसे ट्रेस करने में मदद मिली. इसके बाद महीनों तक सर्विलांस और प्लानिंग के बाद आखिरकार हम उसे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से दबोचने में सफल रहे हैं.' DCP सेन ने कहा,'छह महीने से हमारी टीम झा के फैमिली, फ्रेंड और साथियों के नेटवर्क को ट्रेस कर रही थी. उन्होंने उन घटनास्थलों की भी जांच की, जहां उसने पिछले अपराध किए थे. साथ ही दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में उन फल-सब्जी मंडियों में लोगों से पूछताछ की गई, जहां झा ने कभी काम किया था.'
कॉल डाटा रिकॉर्ड से मिला सुराग, फिर हुई गिरफ्तारी
DCP सेन के मुताबिक, हजारों कॉल डाटा रिकॉर्ड की छानबीन करने के बाद टीम को एक ऐसा मोबाइल नंबर मिला, जिससे उन्हें चंद्रकांत झा की लोकेशन मिली. इसके बाद उसे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से 17 जनवरी को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह बिहार फरार होने की कोशिश कर रहा था.
झा को मिलनसार मानते थे उसके जानकार
DCP के मुताबिक, मूलरूप से बिहार निवासी चंद्रकांत झा ने सीरियल किलिंग 1998 में शुरू की थी. वह दिल्ली में आजादपुर मंडी के करीब रहता था. लोग उसके मिलनसार स्वभाव के कारण जल्द उसके झांसे में आ जाते थे. वह बिहार से आने वाले शरणार्थियों को नौकरी दिलाने में मदद करने के अलावा उन्हें कई बार खाना भी खिलाता था. इसी दौरान अचानक उसने सीरियल किलिंग शुरू कर दी.
इन हत्याओं की मिली जानकारी
- साल 1998 में चंद्रकांत ने पहली बार दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में मंगल उर्फ औरंगजेब की हत्या की.
- चंद्रकांत ने मंगल के शरीर को टुकड़े करके ठिकाने लगाया, लेकिन पकड़ा गया और 4 साल जेल में रहा.
- चंद्रकांत ने जून, 2003 में हैदरपुर में अपने दोस्त शेखर को शराबी और झूठा बताकर उसकी हत्या कर दी.
- चंद्रकांत ने शेखर की हत्या करने के बाद उसके शव को भी टुकड़े करके अलीपुर में ठिकाने लगा दिया था.
- नवंबर, 2003 में बिहार से आए उमेश की हत्या उसने कथित धोखेबाजी के लिए की और तिहाड़ जेल के करीब शव ठिकाने लगाया.
- नवंबर, 2005 में उसने गुड्डू को उसकी मारिजुआना पीने की आदत के लिए मारकर मंगोलपुरी में शव डंप कर दिया.
- अक्टूबर, 2006 में चंद्रकांत ने अमित को महिलाओं से अवैध संबंध रखने के आरोप में मारकर शव तिहाड़ जेल के बाहर फेंक दिया.
कराटे के ननचाकू से किए थे सारे मर्डर
DCP सेन के मुताबिक, झा अपने शिकार के हाथ बांधने के बाद उसे सजा देने की बात कहता था और कराटे के ननचाकू से उसका गला घोंट देता था. इसके बाद वह शव के बहुत सावधानी से टुकड़े-टुकड़े करता था, जिससे कम से कम खून फैले. शरीर के टुकड़ों को प्लास्टिक बैग में पैक करने के बाद वह अपनी मॉडिफाइड साइकिल-रिक्शा के जरिये ले जाकर ठिकाने लगा देता था. उसने अधिकतर शव तिहाड़ जेल के करीब डंप किया था. शव के टुकड़ों के साथ वह हाथ से लिखा हुए एक नोट छोड़ता था, जिसमें पुलिस पर तंज कसते हुए वह खुद को पकड़ने की चुनौती देता था.
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दिल्ली पुलिस ने दबोचा 'दिल्ली का कसाई', डेढ़ साल पहले पैरोल पर फरार हुआ था सीरियल किलर