यहां जानें कि दुनिया खत्म होने को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग वैज्ञानिकों ने क्या राय रखी थी और उनकी भविष्यवाणियां किस पद्धति पर आधारित थीं.
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न्यूटन ने बाइबिल में दर्ज ऐतिहासिक घटनाओं का अध्ययन किया और उन्हें गणितीय गणनाओं से जोड़ा. उनका मानना था कि रोमन साम्राज्य की स्थापना (800 ईस्वी) के बाद से पृथ्वी का अंत शुरू हो चुका है. न्यूटन ने अपनी यह भविष्यवाणी एक लंबी पर्ची पर लिखी थी, जिसे बाद में शोधकर्ताओं ने खोजा. वे धर्म और विज्ञान के मेल से दुनिया के अंत की व्याख्या करने में रुचि रखते थे.
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आधुनिक वैज्ञानिक समुदाय न्यूटन की भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लेता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, न्यूटन ने जो गणना की थी, वह आधुनिक खगोलीय गणनाओं की तुलना में बेहद साधारण थी. कई वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि न्यूटन का कहना था कि 2060 से पहले दुनिया खत्म नहीं होगी, लेकिन उसके बाद कभी भी हो सकती है. न्यूटन की यह भविष्यवाणी मुख्य रूप से बाइबिल और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित थी, इसलिए इसे वैज्ञानिक रूप से अमान्य माना जाता है.
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पृथ्वी का अंत कई संभावित घटनाओं के कारण हो सकता है. जैसे सूर्य का हाइड्रोजन 5-7 अरब सालों में सूर्य अपने अंतिम चरण में पहुंचकर बृहदकाय लाल तारे (Red Giant) में बदल जाएगा और संभवतः बुध, शुक्र और पृथ्वी को भी निगल सकता है. गामा रे बर्स्ट, अंतरिक्ष में होने वाले अत्यंत शक्तिशाली विस्फोटों से पृथ्वी का वायुमंडल नष्ट हो सकता है. एस्टेरॉयड टकराव से एक बड़ा क्षुद्रग्रह (Asteroid) पृथ्वी से टकरा सकता है, जिससे डायनासोर के काल की तरह वैश्विक विनाश हो सकता है.
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जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं और तापमान असंतुलित हो रहा है, जो पृथ्वी पर जीवन को मुश्किल बना सकता है. परमाणु युद्ध भी पृथ्वी के विनाश का एक बड़ा कारण बन सकता है. यदि विश्व शक्तियां परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करती हैं, तो यह संपूर्ण पर्यावरण को नष्ट कर सकता है. वहीं, यदि कोई सुपरमैसिव ब्लैक होल पृथ्वी के निकट आ जाए या कोई अत्यधिक गुरुत्वीय तरंग (Gravitational Wave) हमारी सौर प्रणाली को प्रभावित करे, तो पृथ्वी के अस्तित्व को खतरा हो सकता है. हालांकि, यह संभावना अत्यधिक कम है, क्योंकि पृथ्वी के पास किसी बड़े ब्लैक होल के संकेत नहीं मिले हैं.
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न्यूटन की भविष्यवाणी धार्मिक और गणितीय अवधारणाओं पर आधारित थी, जो आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर खरी नहीं उतरती. वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, पृथ्वी का अंत निश्चित है, लेकिन यह जल्द नहीं होगा. वास्तविक खतरे जैसे जलवायु परिवर्तन, परमाणु युद्ध और एस्टेरॉयड टकराव अधिक चिंताजनक हैं. हमें वैज्ञानिक चेतना और सतर्कता के साथ भविष्य की तैयारी करनी चाहिए, बजाय किसी पुरानी भविष्यवाणी से भयभीत होने के.