डीएनए हिंदी: देश आज 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले फर तिरंगा फहराया. लाल किले के प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से पहली बार स्वदेशी तोप से सलामी दी गई. उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में यह भी कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज का जन आंदोलन है जिसे सबको मिलकर आगे बढ़ाना है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आजादी के 75 साल में पहली बार ऐसा हुआ हुआ है कि लाल किले से सलामी के लिए देश में निर्मित तोप का इस्तेमाल किया गया." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आजादी के 75 साल के बाद जिस आवाज को सुनने के लिए हमारे कान तरस रहे थे. आज 75 साल के बाद वो आवाज सुनाई दी है. 75 साल के बाद लाल किले पर तिरंगे को सलामी देने का काम पहली बार ‘मेड इन इंडिया’ तोप ने किया है."
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, ये हर नागरिक का, हर सरकार का, समाज की हर एक इकाई का दायित्व बन जाता है. आत्मनिर्भर भारत, ये सरकारी एजेंडा या सरकारी कार्यक्रम नहीं है. ये समाज का जनआंदोलन है, जिसे हमें आगे बढ़ाना है. पीएम मोदी ने कहा, "आज देश की सेना के जवानों का हृदय से अभिनंदन करना चाहता हूं। मेरी आत्मनिर्भर की बात को संगठित स्वरूप में, साहस के स्वरूप में, सेना के जवानों और सेनानायकों ने जिस जिम्मेदारी के साथ कंधे पर उठाया, उनको आज मैं सलाम करता हूं."
पीएम मोदी ने दिलाए ये पांच प्रण
लाल किले से अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले 25 साल की यात्रा को देश के लिए 'अत्यंत महत्वपूर्ण' करार दिया और इस 'अमृत काल' में विकसित भारत, गुलामी की हर सोच से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता व नागरिकों द्वारा अपने कर्तव्य पालन के 'पंच प्राण' का आह्वान किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी का 76वां स्वतंत्रता दिवस एक ऐतिहासिक दिन है और यह पुण्य पड़ाव, एक नयी राह, एक नए संकल्प और नए सामर्थ्य के साथ कदम बढ़ाने का शुभ अवसर है.
उन्होंने कहा कि जब वह 130 करोड़ देशवासियों के सपनों को देखते हैं और उनके संकल्पों की अनुभूति करते हैं तो आने वाले 25 साल के लिए देश को 'पंच प्राण' पर अपनी शक्ति, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य को केंद्रित करना है. उन्होंने कहा, 'हमें पंच प्राण को लेकर 2047 तक चलना है. जब आजादी के 100 साल होंगे, आजादी के दीवानों के सारे सपने पूरा करने का जिम्मा उठा करके चलना है.'
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प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत' को पहला प्राण बताया और कहा कि इससे कुछ कम नहीं होना चाहिए. गुलामी की हर सोच से मुक्ति पाने को उन्होंने दूसरा प्राण बताया और कहा कि गुलामी का एक भी अंश अगर अब भी है, तो उसको किसी भी हालत में बचने नहीं देना है. उन्होंने कहा कि इस सोच ने कई विकृतियां पैदा कर रखी है, इसलिए गुलामी की सोच से मुक्ति पानी ही होगी. प्रधानमंत्री ने विरासत पर गर्व करने को तीसरा प्राण बताया और कहा कि यही वह विरासत है जिसने भारत को स्वर्णिम काल दिया है. उन्होंने एकता और एकजुटता को चौथा प्राण और नागरिकों के कर्तव्य को पांचवां प्राण बताया.
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