UPSC की सिविल सेवा परीक्षा को पास करना कोई बच्चों का खेल नहीं है. यह भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. इस परीक्षा को पास करने के लिए न सिर्फ कड़ी मेहनत की जरूरत होती है बल्कि अत्यधिक समर्पण और दृढ़ता की भी जरूरत होती है. हर साल हजारों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही फाइनल लिस्ट में अपनी जगह बना पाते हैं. आज हम आईएफएस अधिकारी अनीशा तोमर की प्रेरक सफलता की कहानी आपके साथ शेयर करेंगे.
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अनीशा को बचपन से ही सीखने का बहुत शौक था. इसी ने उनकी भविष्य की उपलब्धियों की नींव रखी. उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और ग्रेजुएशन लेवल पर ही यूपीएससी परीक्षा देने का मन बना लिया. 2016 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनीशा ने यूपीएससी पाठ्यक्रम के अनुसार अपने स्टडी मैटेरियल को व्यवस्थित करके परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. उन्होंने एक स्टडी प्लान बनाया जिसका उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान लगातार पालन किया.
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असफलताओं से निराश न होना
अनीशा अपने पहले प्रयास में प्रीलिम्स के कटऑफ से मामूली अंतर से चूक गई थी और निराश हो गई थीं. हालांकि उन्होंने इस असफलता से खुद को हतोत्साहित नहीं होने दिया और अपने दूसरे अटेम्प्ट के लिए तैयारी करने लगीं.
बीमारी से जूझना
फरवरी 2018 में जब अनीशा अपने दूसरे प्रयास की तैयारी कर रही थी तो उसे इडियोपैथिक इंट्राक्रैनील हाइपरटेंशन (IIH) का पता चला. हालांकि बीमारी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को हासिल करने में जुटी रहीं. अनीशा ने इंटरव्यू में बताया कि उन्हें ऐसा लग रहा था कि वह अपनी ताकत खो रही हैं, लेकिन दवा लेने, एमआरआई करवाने और स्पाइनल टैप करवाने की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने साहस के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी. अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने सफलतापूर्वक प्रीलिम्स एग्जाम पास कर ली लेकिन मुख्य परीक्षा में उन्हें संघर्ष करना पड़ा. वह सिर्फ 6 नंबरों से पीछे रह गईं.
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सफलता हासिल करना
सालों की कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बाद अनीशा ने आखिरकार अपने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की और देशभर में 94वीं रैंक हासिल की और आईएफएस अधिकारी बनीं.
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Anisha Tomar IFS
2 बार लगातार हुईं फेल, दिमागी बीमारी से लड़ीं...इस रैंक के साथ UPSC क्रैक कर अधिकारी बनीं अनीशा तोमर