बिहार के औरंगाबाद की रहने वाली साहसी और होनहार बेटी दिव्या कुमारी ने अपने आत्मविश्वास और हौसले से हर कठिनाई से निकलकर एक मिसाल कायम की है. एक बेटी जिसने अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए कभी हार नहीं मानी और डटकर कठिनाई का सामना किया. उनकी कहानी से ये सिद्ध होता है कि मेहनत और लगन से मंजिल हासिल की जा सकती है. औरंगाबाद जिले की रहने वाली दिव्या कुमारी ने पहले ही प्रयास में बीपीएससी बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता में सफलता हासिल कर जज बनने का गौरव प्राप्त किया है. लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे का संघर्ष दिल को झंकझोर देगा. 

पिता को खोया 

दिव्या के पिता स्वर्गीय विजय सिंह का सपना था कि उनकी बेटी जज बने, लेकिन साल 2021 में कोविड महामारी के दौरान उनका निधन हो गया. महामारी में पिता को खोने के बाद दिव्या पूरी तरह से टूट चुकी थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और खुद से ये वादा किया कि वो अपने पिता का सपना हर हाल में पूरा करेंगी. इस सफर में उनकी मां ने उनका पूरा साथ दिया. मां ने दिव्या को हिम्मत दी और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. दिव्या पांच बहनों और एक भाई के बीच पली-बढ़ी हैं. उनकी सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है. 

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सोशल मीडिया से बनाई दूरी

दिव्या ने एक इंटरव्यू में बताया कि BPSC PCS (J) की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखनी चाहिए, क्योंकि यह कई बार ध्यान भटकाने का काम करता है.  प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू के दौरान सिलेबस पर पूरा ध्यान केंद्रित करना बेहद जरूरी है. यदि आप जज बनना चाहते हैं, तो LLB की पढ़ाई के दौरान ही पूरे ध्यान के साथ तैयारी शुरू कर दें, क्योंकि यही पांच वर्षों की पढ़ाई आपको न्यायिक सेवा में सफल होने में मदद करेगी.

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पिता को खोने के बाद भी नहीं भूली उनकी आखिरी इच्छा, जज बनकर भरी सपनों की उड़ान,
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Success Story: पिता को खोने के बाद भी नहीं भूली उनकी आखिरी इच्छा, जज बनकर भरी सपनों की उड़ान, संघर्ष सुन नम हो जाएंगी आंखें
 

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ये कहानी है बिहार की होनहार बेटी की, जिसने कठिन परिस्थियों के बावजूद अपने पिता का सपना पूरा कर दिखाया. उनकी संघर्ष की कहानी सुन आपको प्रेरणा मिलेगी साथ ही आपकी आंखें नम हो जाएंगी.