अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत आने के बाद पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते तनावपूर्ण हो चुके हैं. पाकिस्तान की ओर से तालिबान को हमेशा से समर्थन दिया गया, लेकिन तालिबान के सरकार में आते ही सारे समीकरण बदल गए. जिस तालिबान की पैरवी पाकिस्तान पूरी दुनिया में करता था, आज उसी के साथ पाक-अफ़ग़ान सीमा पर उसके युद्ध जैसे हालत हैं. वहीं दूसरी तरफ तालिबान के संबंध भारत के साथ सुधर रहे हैं. पाकिस्तान को लगता था कि अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता में तालिबान के आते ही वो वहां पर अपनी मनमानी करेगा, और अपने पक्ष में उनसे फैसले करवाएगा, लेकिन सारी चीज़ें उसके विपरीत हो रही हैं. उसका खुद का पाला-पोसा संगठन अब उसका सबसे बड़ा दुश्मन बनता जान रहा है. पाकिस्तान के भीतर तालिबान का मित्र संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पाकिस्तानी फौज के खिलाफ हमलावर है. साथ ही TTP पर स्ट्राइक करने के नाम पर पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान के अंदर हवाई हमले कर चुका है. इसे अफ़ग़ान तालिबान ने अपने संप्रभुता पर हमला बताया. उसके बाद से सरहद पर कॉन्फ़्लिक्ट छिड़ा हुआ है. तालिबान को अपने लिए नासूर बनता देख पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान में एक नई चाल चल दी है. पाकिस्तान की ओर से अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और खुरासान प्रोविंस (ISKP) को सपोर्ट किया जा रहा है.
ISKP को मजबूत कर रहा पाकिस्तान
ISKP को पाकिस्तान की ओर से अब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है, ताकि अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान हुकूमत को कमजोर किया जा सके. पिछले कुछ समय से ISKP तालिबान और उसके लीडरशिप को लगातार निशाना बना रहा है. इस आतंकी गुट को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की ओर से नए आतंकवादी मुहैया कराया जा रहा है. साथ ही इसे ऑर्गेनाइज़ेशन को पाक स्टेब्लिशमेंट की ओर से हर तरह की सहायता प्रदान की जा रही है. इस संगठन की गतिविधियां अफ़ग़ानिस्तान के साथ ही भारत और ईरान विरोधी हैं. मीडिया की खबरों के अनुसार पाकिस्तान की ओर से तालिबान के साथ खराब होते संबंध के बीच आतंकवादी गुट आईएसकेपी के साथ अपने रिश्तों को मजबूत किया जा रहा है. आईएसआई इस के लिए बलूचिस्तान में एक ट्रेनिंग सेंटर का भी निर्माण करने जा रही है.
क्या है आईएसकेपी?
आईएसकेपी का गठन 2014 में अल-कायदा, तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) और अफगानिस्तान और पाकिस्तान के पूर्व तालिबान लड़ाकों सहित समूहों से दलबदलुओं के एक समूह के रूप में किया गया था. जनवरी 2015 में केंद्रीय इस्लामिक स्टेट की ओर से खुरासान प्रांत में अपने आधिकारिक विस्तार का एलान किया गया था. तब से इसकी पहचान आईएसकेपी के तौर पर होने लगी. अनुमान है कि ISKP के 4,000 से 6,000 सदस्य हैं . यह साफ नहीं है कि ISKP की अगुवाई अभी कौन कर रहा है है, क्योंकि उनके पूर्व सबसे बड़े नेता सनाउल्लाह गफारी को 2023 में तालिबान ने मार दिया था. ISKP के सदस्यों और अल-कायदा और TTP जैसे अन्य समूहों के बीच संबंध संघर्षपूर्ण बताया गया है. खुरासान नाम आधुनिक ईरान, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के एक प्राचीन क्षेत्र को दर्शाता है . इसके नाम के विपरीत यह दर्शाता है कि ISKP केवल खुरासान क्षेत्र में सक्रिय है, वे सामान्य ISIS सिद्धांत का पालन करते हैं जहां लक्ष्य एक अंतरराष्ट्रीय खिलाफत स्थापित करना है. हाल ही में इस आतंकी संगठन की ओर से तालिबान के हक्कानी नेटवर्क के नेताओं की हत्या की गई है, जिसके बाद इस संगठन के पर्जेंस को लेकर घमासान छाया हुआ है.
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ISKP Leader Rahmatullah Nabil
क्या है आतंकी गुट ISKP? जो अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ तेजी से उभर रहा, पाकिस्तान का साथ, भारत के लिए खतरा