पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान उन चुनिंदा देशों में है जो आतंकवाद की उसी फसल को काट रहा है जिसे उसके हुक्मरानों ने अपने अपने शासनकाल में खाद और पानी दिया. हर बीतते दिन के साथ हालात कैसे बद से बदतर हो रहे हैं? यदि इसे समझना हो तो हम इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी उस एडवाइजरी का रुख कर सकते हैं जो उसने अपने नागरिकों के लिए जारी की है. एडवाइजरी में पाकिस्तान की राजधानी में संभावित आतंकवादी हमलों के विश्वसनीय खतरों की चेतावनी दी गई है.
यह चेतावनी उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें बताया गया है कि प्रतिबंधित समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सबसे प्रमुख स्थलों में से एक फैसल मस्जिद को निशाना बना सकता है. बताते चलें कि यह एडवाइजरी टीटीपी और एक अन्य प्रतिबंधित सशस्त्र गुट हाफिज गुल बहादुर समूह, द्वारा वीडियो प्रसारित किए जाने के बाद जारी की गई है, जिसमें फैसल मस्जिद के प्रांगण में उनके नाम प्रदर्शित किए गए हैं.
बताया जा रहा है कि वीडियो ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके कारण अमेरिकी दूतावास को एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं. अपनी प्रतिक्रिया के हिस्से के रूप में, दूतावास के क्षेत्रीय सुरक्षा कार्यालय ने अमेरिकी कर्मचारियों को अगले आदेश तक फैसल मस्जिद क्षेत्र में जाने से प्रतिबंधित कर दिया है.
परामर्श में इस्लामाबाद में अमेरिकी नागरिकों से अतिरिक्त सावधानी बरतने का भी आग्रह किया गया है, जिसमें बड़ी सभाओं से बचना, सार्वजनिक स्थानों पर सतर्क रहना और असुरक्षित महसूस होने पर तुरंत किसी भी क्षेत्र को छोड़ना शामिल है.
दूतावास ने आगे व्यक्तिगत सुरक्षा योजनाओं की समीक्षा करने, स्थानीय मीडिया के माध्यम से अपडेट रहने, कम प्रोफ़ाइल बनाए रखने, पहचान पत्र रखने और अधिकारियों के साथ सहयोग करने की सलाह दी है.
इस्लामाबाद पुलिस और पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने अभी तक अमेरिकी दूतावास के सुरक्षा अलर्ट या फैसल मस्जिद के लिए विशिष्ट खतरों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
पाकिस्तान के लिए पहले कब जारी की अमेरिका ने सिक्योरिटी एडवाइजरी?
हाल के महीनों में यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने पाकिस्तान में सिक्योरिटी एडवाइजरी जारी की है. नवंबर 2024 में, दूतावास ने संभावित सुरक्षा खतरों के कारण अमेरिकी नागरिकों और राजनयिक कर्मचारियों को सेरेना होटल और पेशावर गोल्फ क्लब से दूर रहने की सलाह दी थी.
वह चेतावनी पेशावर में संवेदनशील स्थलों के पास के स्थानों पर हमलों की संभावना का संकेत देने वाली खुफिया जानकारी पर आधारित थी. आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) के एक अधिकारी के मुताबिक मौजूदा सुरक्षा अलर्ट को पंजाब में हाल ही में CTD द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान मिली खुफिया जानकारी से जोड़ा गया है. जिसमें आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, अधिकारियों ने खतरे की वास्तविक प्रकृति का खुलासा नहीं किया है.
पाकिस्तान की बढ़ती सुरक्षा चिंताएं
पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि देखी है, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं. टीटीपी, जो मुख्य रूप से अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर संचालित होता है, सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए कई हमलों के लिए ज़िम्मेदार रहा है.
यह समूह शरिया कानून के अपने संस्करण को लागू करना चाहता है और राज्य प्राधिकरण को चुनौती देना चाहता है. हाफ़िज़ गुल बहादुर समूह, एक और सक्रिय सशस्त्र गुट है, जो मुख्य रूप से उत्तरी वज़ीरिस्तान से संचालित होता है और इसने अपने लक्ष्यों का विस्तार किया है, जिसमें फ़ैसल मस्जिद जैसे हाई-प्रोफ़ाइल स्थान शामिल हैं.
सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अफ़गानिस्तान से अमेरिकी सेना की आंशिक वापसी ने ऐसे गुटों को बढ़ावा दिया है, जिससे आतंकवादी हमलों में वृद्धि हुई है. पाकिस्तान के सुरक्षा बलों को लगातार बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि हमले अधिक लगातार और व्यापक होते जा रहे हैं.
हाल की घटनाओं ने सैन्य प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक स्थानों और सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता को लेकरचिंताएंऔर बढ़ गई हैं.
अमेरिकी दूतावास की ओर से नवीनतम चेतावनी के बाद इस्लामाबाद और पूरे पाकिस्तान में अधिकारी उच्च अलर्ट पर हैं. हालांकि पाकिस्तानी कानून प्रवर्तन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन फैसल मस्जिद और अन्य प्रमुख स्थलों सहित संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को कड़ा किए जाने की उम्मीद है.
आने वाले दिन यह निर्धारित करेंगे कि टीटीपी और संबद्ध समूहों द्वारा उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी या नहीं. इस बीच, पाकिस्तान में अमेरिकी नागरिकों को दूतावास के मार्गदर्शन का पालन करने और सतर्क रहने की सलाह दी जाती है.
बहरहाल अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन अमेरिका के लोग करते हैं और फैसल मस्जिद जाने से बचते हैं या नहीं इसका फैसला तो वक़्त करेगा लेकिन जो वर्तमान है और उसमें भी जो पाकिस्तान का हाल है ये कहना हमारे लिए अतिश्योक्ति नहीं है कि एक मुल्क के रूप में पाकिस्तान ने अपनी बर्बादी का रास्ता खुद चुना है.
पहले पाकिस्तान ने खुद आतंकवाद को हवा, खाद, पानी दिया और आज जब आतंकवाद का दानव बेकाबू हो गया है पाकिस्तान भागा भागा फिर रहा है. कुल मिलाकर पाकिस्तान का भविष्य अंधकार में है और जो पूर्व में उसने किया है यक़ीनन उसकी कीमत वहां की आवाम चुकाएगी.
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इस्लामाबाद में आतंकियों के रडार पर फैसल मस्जिद, कैसे अमेरिका ने पाकिस्तान को दिखाया आईना?