3 फरवरी 2025. तारीख, जब दिल्ली विधानसभा चुनावों का प्रचार थम जाएगा. 5 फरवरी को सभी 70 सीटों पर पोलिंग होगी. 8 फरवरी को नतीजे बाहर आ जाएंगे और इसका निर्धारण हो जाएगा कि 2025 में दिल्ली की सत्ता पर कौन काबिज होगा. यूं तो आप से लेकर कांग्रेस तक सभी ने दिल्ली की सत्ता हथियाने के लिए एड़ी से लेकर चोटी तक का जोर लगा दिया है. लेकिन इस चुनाव में जैसी मेहनत भारतीय जनता पार्टी कर रही है, उसे देखकर स्वतः इस बात की पुष्टि हो जाती है कि भाजपा किसी भी हाल में दिल्ली हारने के मूड में नहीं है.
आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में गरीबों, वरिष्ठ नागरिकों के अलावा महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया है. देखा जाए तो यह सही इसलिए भी है क्योंकि पूर्व में हुए चुनाव का गणित यही बताता है कि दिल्ली में महिलाएं हमेशा ही बड़ी संख्या में मतदान करती हैं और किंगमेकार की भूमिका में रही हैं.
दिल्ली के लिए महिलाएं हैं ज़रूरी
दिल्ली के लिए महिलाएं क्यों ज़रूरी है? इसका अंदाजा एसबीआई रिसर्च की उस रिपोर्ट से लगा सकते हैं, जिसमें बताया गया है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में 18 मिलियन अधिक महिलाओं ने मतदान किया, जो बेहतर साक्षरता, नौकरियों, आवास और स्वच्छता और प्रधानमंत्री आवास योजना और मुद्रा ऋण जैसी योजनाओं के कारण हुआ.
2020 के दिल्ली चुनावों में, 60 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी का समर्थन किया. जबकि केवल 35 प्रतिशत ही महिलाएं ऐसी थीं जिन्होंने भाजपा पर विश्वास जताया. उसी चुनाव में, 49 प्रतिशत पुरुष मतदाता आप के पाले में गए जबकि 43 प्रतिशत वोटर ऐसे थे जिन्होंने भाजपा का साथ दिया.
ज्ञात हो कि दिल्ली में महिलाओं की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है, और पुरुषों की संख्या 54 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि महिलाओं ने AAP को लगभग 12 प्रतिशत की बढ़त दी, जबकि पुरुषों ने केवल तीन प्रतिशत की.
दिल्ली चुनावों को खास बनाते हैं समाज के अलग अलग वर्ग
चुनाव कहीं के भी हों, जब तक समाज के अलग अलग वर्गों का जिक्र न हो सारी बातें लगभग अधूरी रहती हैं. वर्ग, चुनाव में हमेशा ही अहम भूमिका निभाते हैं. और शायद यही वो कारण है जिसके चलते आप ने ऑटो रिक्शा चालकों के लिए रियायतें, वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवा और मुफ्त पानी और बिजली योजनाओं को जारी रखने की घोषणा की है.
वहीं भाजपा ने गरीबों के लिए सब्सिडी वाली कैंटीन की घोषणा की है, जहां 5 रुपये में थाली और 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा. ध्यान रहे कि दिल्ली की आबादी में गरीबों की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत, मध्यम वर्ग की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत और उच्च वर्ग की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है.
गौरतलब है कि दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय भारत में सबसे अधिक है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक है. इसलिए, यहां मध्यम और उच्च वर्ग की आबादी अधिक है. 2020 में, AAP ने 54 प्रतिशत वोट शेयर, भाजपा ने 39 प्रतिशत और कांग्रेस ने चार प्रतिशत वोट शेयर दर्ज किए, जिसमें AAP को कुल 15 प्रतिशत वोट शेयर की बढ़त मिली.
AAP को भाजपा पर मिली बढ़त का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है. महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए चाहे वो आप और कांग्रेस हों या फिर भाजपा सभी ने नकद अनुदान का वादा किया है. AAP ने अपने प्रचार में महिला मतदाताओं को मुफ्त बस यात्रा योजना की बात कही और मुफ्त पानी और बिजली, स्कूलों के उन्नयन और मोहल्ला क्लीनिकों के निर्माण का जिक्र किया.
दिल्ली के अंतर्गत नहीं नकारा जा सकता धर्म का मुद्दा
दिल्ली चुनावों में धर्म को भी एक अहम मुद्दा माना जा रहा है. ध्यान रहे कि दिल्ली के मतदाताओं में 82 प्रतिशत हिंदू, 13 प्रतिशत मुसलमान और पांच प्रतिशत सिख हैं. 2020 के चुनावों में, 83 प्रतिशत मुसलमानों ने AAP को वोट दिया, जबकि केवल तीन प्रतिशत ने भाजपा का समर्थन किया.
उसी चुनाव में 67 प्रतिशत सिखों ने AAP का और 28 प्रतिशत ने भाजपा का समर्थन किया, जिससे अरविंद केजरीवाल की पार्टी को 39 प्रतिशत की बढ़त मिली. लगभग 49 प्रतिशत हिंदुओं ने AAP का समर्थन किया, जबकि 46 प्रतिशत ने भाजपा का समर्थन किया, जिससे उसे तीन प्रतिशत की मामूली बढ़त मिली.
इसका मतलब है कि हिंदुओं ने AAP को लगभग तीन प्रतिशत, मुसलमानों ने 10 प्रतिशत और सिखों ने 15 प्रतिशत वोट शेयर में से दो प्रतिशत की बढ़त दी.
वर्तमान में भाजपा ने आप पर तमाम तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि आप ने बांग्लादेश और म्यांमार से आए रोहिंग्याओं को शरण देने के साथ साथ उनका नाम वोटर लिस्ट में डलवाया है.
भाजपा के इस बयान पर आप ने कहा कि यह गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा की विफलता है कि अवैध अप्रवासी बांग्लादेश से भारत में प्रवेश कर रहे हैं. आप ने हिंदुओं के बीच अपने समर्थन को बढ़ाने के लिए पुजारियों के लिए रियायतों की घोषणा करते हुए नरम हिंदुत्व का रुख भी अपनाया है.
जीतने के लिए क्या रणनीति अपनाए भाजपा
भाजपा को आप के महिला वोट में सेंध लगाने की जरूरत है, जिससे उसे 12 प्रतिशत की बढ़त मिलती है. यह महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह नकद देने के अपने वादे और महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश में इसी तरह की योजनाओं के अपने ट्रैक रिकॉर्ड पर निर्भर है.
भाजपा को उम्मीद है कि कांग्रेस आप के मुस्लिम और सिख वोटों में सेंध लगाएगी, जिससे उसकी 10 और 2 प्रतिशत की बढ़त बेअसर हो जाएगी. कांग्रेस ने आप के पांच के मुकाबले आठ मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे 10 मुस्लिम प्रभावित सीटों पर उसकी नजर है. हालांकि, मुसलमानों के कांग्रेस को 'वोट-कटवा' मानने का खतरा है, जिससे भाजपा को इस दौड़ में फायदा होगा.
भाजपा, अपर क्लास और अपर क्लास ओबीसी (आबादी का लगभग 50 प्रतिशत) के बीच 10 प्रतिशत से आगे है. हालांकि, दलितों, निम्न ओबीसी और अल्पसंख्यकों (आबादी का अन्य 50 प्रतिशत) के बीच यह 30 प्रतिशत से अधिक पीछे है, इस प्रकार आप को कुल मिलाकर 15 प्रतिशत वोट शेयर की बढ़त मिलती है.
भाजपा को यह भी उम्मीद है कि शीशमहल और शराब विवाद पार्टी के सबसे पुराने समर्थकों, आप के लिए मध्यम वर्ग के समर्थन को कम कर देगा. कथित रोहिंग्या घुसपैठ जैसे मुद्दे भी भाजपा के पक्ष में काम कर सकते हैं.
कुल मिलाकर दिल्ली विधानसभा चुनाव जहां एक तरफ भाजपा के लिए आन, बान, शान का मुद्दा है. तो वहीं इसे आम आदमी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है.
दिल्ली विधानसभा चुनावों पर पैनी नजर बनाए तमाम राजनीतिक पंडित ऐसे हैं, जिन्होंने कांग्रेस को लेकर भी दिलचस्प तर्क दिए हैं और कहा है कि यदि इन चुनावों में कांग्रेस 5 सीटें भी अपने पाले में कामयाब होती है, तो दिल्ली चुनाव उसके और राहुल गांधी के लिए संजीवनी साबित होगा.
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