भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं और हैं इनमें तमाम शहर. लेकिन कानपुर जुदा है. क्यों जुदा है? सिर्फ इस सवाल के जवाब को कोई देने बैठे तो कई-कई दिन लग सकते हैं. कानपुर के विषय में हमने भी बहुत सोचा. गुलमोहर के पेड़ पर टेक लगा कर सोचा. नदी किनारे बैठ कर सोचा. मॉल में आइस क्रीम खाते हुए सोचा. मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखते हुए सोचा. सोचा और पाया कि One Fine Day ईश्वर अच्छे मूड में थे. उन्हें भी कुछ क्रिएटिव करने का सूझा होगा. उन्होंने दुनिया बना दी और अमीबा बनाया. बेचारा अमीबा बोर न हो, ईश्वर ने इंसान बनाए, और फिर इंसान बोर न हो इसलिए उन्होंने कानपुर बनाया. साथ रहने के लिए. गप्प-बकर करने के लिए. इतिहास रचने के लिए.
नहीं सच में. कोई कुछ कह ले, लेकिन सत्य यही है कि दुनिया की सारी खुराफातें एक जगह हैं और कानपुर और वहां के लोगों की चकल्लस दूसरी जगह है. कानपुर के लोगों का लेवल क्या है? इसे उस घटना से समझिये जहां एक आदमी कुछ इस हद तक टोपीबाज निकला कि उसने खुद को 'टोपीबाज' क्लेम करने वाले एक शख्स को ही टोपी पहना दी.
बात आगे बढ़े. उससे पहले ये जान लीजिये कि कानपुर के शख्स ने जिसे टोपी पहनाई वो और कोई नहीं बल्कि एक प्रोफेशनल ठग है. जो डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लोगों को लूट रहा था.
आइये समझें क्या है मैटर ?
मामला समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे चलना होगा। और 6 मार्च 2025 का अवलोकन करना होगा. इस दिन कानपुर के ही भूपेंद्र सिंह अपनी रोजाना की ज़िन्दगी में व्यस्त थे कि तभी उनका फोन बजा. अभी ढंग से हाए-हेलो हुआ भी नहीं था कि फोन पर दूसरी तरफ बैठे व्यक्ति ने खुद को सीबीआई ऑफिसर बताते हुए कहा कि उसके पास भूपेंद्र के कुछ अश्लील वीडियो हैं. और उसके खिलाफ केस दर्ज हो चुका है.
कथित सीबीआई ऑफिसर शायद ये भूल गया कि वो किससे बात कर रहा है. भले ही वो इस बात को भूल गया हो. मगर उसे कम से कम इस बात का ख्याल तो रखना चाहिए था कि वो कहां बात कर रहा है.
चूंकि कानपुरियों के बारे में बड़े बुजुर्ग पहले ही यह फरमा चुके हैं कि यहां के आदमी ने घाट घाट का पानी पिया हुआ होता है. इसलिए भूपेंद्र सिंह ये पहले ही भांप गये कि उनके साथ क्या हो रहा है. इस बीच ठग ने भूपेंद्र से 16,000 रुपये की मांग की और उसे फर्जी एफआईआर की कॉपी भेजी गई.
ये सब करते हुए शायद ठग को यह लगा हो कि बस कुछ देर और. चिड़िया उसके जाल में फंस ही गयी है. लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था. भूपेंद्र ने उल्टे ठग को ही उसके बिछाए जाल में फंसा दिया.
भूपेंद्र ने अपने को बारहवीं का छात्र बताते हुए ठग से एक दिन का समय मांगा और कहा कि घर से चोरी की गई सोने की चेन गिरवी रखकर ही वो अब पैसे जुटा पाएगा. अगले दिन जब ठग ने फिर कॉल किया, तो भूपेंद्र ने उससे 3,000 रुपये एडवांस देने को कहा ताकि वह चेन छुड़ा सके.
ठग झांसे में आ गया और उसने भूपेंद्र को पैसे ट्रांसफर कर दिए.इसके बाद, भूपेंद्र ने ठग से कहा कि जौहरी ने उसे नाबालिग मानते हुए माता-पिता को बुलाने को कहा है. फिर उसने ठग से खुद को उसका पिता बनकर बात करने के लिए कहा. इसके बाद ठग ने फिर 4,500 रुपये ट्रांसफर किये.
इसके बाद बीते 10 मार्च को ठग ने पुनः भूपेंद्र को कॉल किया और अपने पैसे वापस मांगे. इस बात फिर भूपेंद्र ने ठग को अपने कनपुरिया होने का परिचय दिया और कहा कि चेन गिरवी रखकर 1,10,000 रुपये तक का लोन मिल सकता है, लेकिन इसके लिए 3,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस लगेगी. ठग ने घबराकर 3,000 रुपये और भेज दिए.
खैर जल्द ही ठग को इस बात का एहसास हुआ कि उसकी टोपी उसे ही पहना दी गयी है तो वो भूपेंद्र के आगे रोने गिड़गिड़ाने लग गया. ठग ने भूपेंद्र से यह भी कहा कि अब वो अपनी पत्नी को क्या जवाब देगा? उससे कैसे नजरें मिलाएगा ?
बाद में भूपेंद्र ने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में पुलिस को बताया और यह भी कहा कि उसे जो भी पैसे ठग से प्राप्त हुए हैं वो उसे किसी जरूरतमंद को दे देगा.
बहरहाल ठग को इस मामले के बाद कुछ सबक मिला या नहीं? इसपर तो हम कुछ नहीं कह सकते. लेकिन जिस तरह का यह मामला है, उससे इतना तो साफ़ है कि आदमी दुनिया जहान में किसी से भी पंगा ले ले. लेकिन उसे गलती से भी कभी किसी कनपुरिये से पंगा नहीं लेना चाहिए और अगर वो रिस्क ले भी रहा है तो ख्याल रखे वहां मामला पैसे कौड़ी का तो हरगिज नहीं हो.
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