देश में तुष्टिकरण की राजनीति ऐसा बहुत कुछ करा रही है जो न केवल निंदनीय है. बल्कि जिसके चलते देश भी दशकों पीछे जा रहा है. लेकिन नेताओं या ये कहें कि दलों को इससे कोई मतलब नहीं है. उनका एकमात्र उद्देश्य अपने वोट बैंक को साधना है. सवाल होगा कि आखिर ये बातें क्यों? वजह बना है कर्नाटक जहां सरकार ने विधानसभा में सरकारी ठेकों में मुसलमानों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक विधेयक पेश किया. सरकार का इस विधेयक को लाना भर था विपक्ष आग बबूला हो गया है. इस कदम का भाजपा ने तीखा विरोध किया है, जिसने इसे 'असंवैधानिक' करार दिया है और इसे चुनौती देने की कसम खाई है.
कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच के पाटिल ने कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया. कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता (केटीपीपी) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन में 2 करोड़ रुपये तक के सिविल कार्य अनुबंधों और 1 करोड़ रुपये तक के माल/सेवा अनुबंधों में 4 प्रतिशत आरक्षण श्रेणी 2बी (मुस्लिम) के व्यक्तियों के लिए आरक्षित किया गया है.
बताते चलें कि वर्तमान में, कर्नाटक अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 24 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), श्रेणी 1 के लिए 4 प्रतिशत और ओबीसी श्रेणी 2ए के लिए 15 प्रतिशत पर सिविल निर्माण अनुबंधों में आरक्षण प्रदान करता है.
ध्यान रहे कर्नाटक में मुसलमानों को 4 प्रतिशत आरक्षण के साथ ओबीसी की श्रेणी 2बी के तहत शामिल करने की लंबे समय से मांग की जा रही है, जिसे विधेयक औपचारिक रूप देने का प्रयास करता है. भाजपा ने विधेयक का कड़ा विरोध किया है, सदन के उप नेता अरविंद बेलाड ने इसे 'असंवैधानिक दुस्साहस' बताया है.
बेलाड ने तर्क दिया कि बीआर अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं है और कांग्रेस सरकार अपने मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है.
बेलाड ने कहा, 'हम सदन में इसका कड़ा विरोध करेंगे और इसे अदालत में चुनौती देंगे. यह सरकार केंद्र के वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए असंवैधानिक उपाय ला रही है.'
चूंकि कर्नाटक में सरकारी ठेकों में मुसलमानों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा हिंदू बनाम मुस्लिम के साथ साथ कांग्रेस वर्सेज बीजेपी भी हो गया है. इसलिए कांग्रेस विधायक रिजवान अरशद ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि पिछड़े मुस्लिम समुदायों के लिए आरक्षण पहले से ही कानूनी तौर पर 2बी के तहत वर्गीकृत है.
रिजवान अरशद के अनुसार, 'हमने कुरुबा और अन्य सहित कई पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिया है. अगर भाजपा इसे चुनौती देना चाहती है, तो वे अदालत जा सकते हैं.' श्रम मंत्री संतोष लाड ने भी भाजपा के रुख की आलोचना की और उस पर चुनिंदा विरोध का आरोप लगाया.
उन्होंने पूछा, 'भाजपा केवल इस पर सवाल क्यों उठा रही है? हमारे पास 2बी के तहत 105 से अधिक समुदाय हैं, न कि केवल मुस्लिम. क्रीमी लेयर के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के बारे में कोई चर्चा क्यों नहीं हो रही है?'
बहरहाल अब जबकि कर्नाटक में कांग्रेस ने ये फैसला ले लिया है. तो माना यही जा रहा है कि इस फैसले का असर अन्य तमाम राज्यों में होगा और तुष्टिकरण की राजनीति जो पर्दे के पीछे चल रही थी वो अब खुल कर होगी.
ध्यान रहे ऐसे फैसले बांटने वाले हैं तो ये कहना भी गलत नहीं है कि कांग्रेस ने अपने इस फैसले से मुसलमानों को मजबूत नहीं किया है. बल्कि इस विधेयक से कहीं न कहीं उनकी जड़ों में मट्ठा डाला है.
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सरकारी ठेकों में मुसलमानों को 4 प्रतिशत आरक्षण... कर्नाटक में कांग्रेस ने पार की तुष्टिकरण की हद!