तारीख थी 8 मार्च 2025. झारखंड के साथ साथ पूरा देश उस वक़्त दहल गया, जब यह खबर सामने आई कि हजारीबाग में NTPC के एक DGM कुमार गौरव की दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई है. बताया गया कि हमलावरों ने घात लगाकर हमले को उस वक़्त अंजाम दिया जब डीजीएम कुमार गौरव सुबह एनटीपीसी के केरेडारी स्थित दफ्तर के लिए रवाना हो रहे थे. चूंकि मामले ने रांची से लेकर राजधानी दिल्ली तक को दहला दिया था. इसलिए पुलिस ने आनन फानन में मामले की जांच शुरू की. और इस हत्याकांड में रायपुर जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू का नाम सामने आया. जिसे STF ने एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर से रांची लाने के दौरान पलामू जिले में उसका एनकाउंटर किया गया है. रिपोर्ट्स की मानें तो रायपुर से रांची के दौरान पुलिस की गाड़ी पलामू के चैनपुर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई. दुर्घटना के बाद अमन साहू ने एसटीएस जवान से इंसास राइफल छीनकर भागने की कोशिश की.
बताया जा रहा है कि इस दौरान उसने जवान पर गोली चलाई जिससे जवान घायल हो गया. फायरिंग के बाद एसटीएफ ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमन साहू को मौके पर ही ढेर कर दिया. पलामू की एसपी रेशमा रमेशन ने एनकाउंटर की पुष्टि करते हुए जानकारी दी है कि मौके से 2 बम भी बरामद किए गए हैं.
कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू का वही अंजाम हुआ, जो गंभीर अपराधों में संलिप्त अपराधी का होता है. मगर इस एनकाउंटर ने बिकरू हत्याकांड के मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर की यादों को ताजा कर दिया है.
कौन था विकास दुबे? क्या थी उसके एनकाउंटर की कहानी ?
साल था 2020. महीना था जुलाई. 2 और 3 जुलाई की रात बिकरू गांव में विकास और उसके गैंग ने पुलिस पर हमला किया था. इसमें 8 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. घटना के बाद विकास दुबे फरार हो गया था. चूंकि मौत पुलिस वालों की हुई थी इसलिए यूपी पुलिस ने भी इसे मान और प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया था.
मीडिया में बिकरू कांड सुर्खियां बटोर ही रहा था कि घटना के कुछ दिन बाद खबर आई कि विकास दुबे को एमपी के उज्जैन में गिरफ्तार किया. जिसे बाद में एमपी पुलिस ने यूपी पुलिस के हवाले कर दिया. विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था जहां शहर से थोड़ा पहले ही गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ और वो पलट गई.
जिस वक़्त यह एक्सीडेंट हुआ गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे विकास दुबे ने भागने की कोशिश की. इस दौरान वह एक पुलिसकर्मी की 9 एमएम की पिस्टल लेकर भागा. उसने पलटकर गोली चलाई. इसके बाद एसटीएफ की जवाबी फायरिंग में तीन गोलियां उसके सीने में जबकि एक बांह पर लगी और उसकी मौत हो गई.
बहरहाल जिक्र यहां अमन साहू एनकाउंटर का हुआ है. तो भले ही दोनों के मौत की स्क्रिप्ट लगभग एक जैसी हो. मगर अमन साहू इसलिए भी खतरनाक था क्योंकि वह बहुत कम उम्र में जरायम की दुनिया में आ गया था.
शायद आपको यह जानकार हैरत हो, लेकिन सच यही है कि अंडरवर्ल्ड डॉन लॉरेंस बिश्नोई का खासमखास अमन साहू ने मात्र 17 साल की उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था. झारखंड में उसके खिलाफ 100 से अधिक मामले दर्ज हैं.
अमन पहले एक हार्डकोर माओवादी था, और बताया जाता है कि उसने 2013 में अपना खुद का गैंग बनाया था. अमन पर कोयला व्यापारियों से रंगदारी, वसूली, हत्या जैसे मामले दर्ज हैं.
अमन को लेकर जो दावे हो रहे हैं उनके अनुसार वह लॉरेंस बिश्नोई को गुर्गे सप्लाई करता था और बदले में हाईटेक हथियार प्राप्त करता था. बताते अमन साहू की AK-47 के साथ तस्वीरें वायरल हुई थी.
अमन किस हद तक खतरनाक था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसका भी नेटवर्क कनाडा-मलेशिया जैसे देशों से संचालित होता था और अमन के भी कई शूटर्स विदेश में रहते थे.
अमन के विषय में जानकारी यह भी सामने आई है कि इसी साल एनआईए ने टेरर फंडिंग मामले में रांची और हजारीबाग जिले के उसके तीन ठिकानों पर करीब छह घंटे तक बड़ी छापेमारी की थी.
बहरहाल अब जबकि अमन साहू को एनकाउंटर में मार गिराया गया है. इसलिए कहा यही जाएगा कि बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ में क्राइम कंट्रोल के लिहाज से साहू की मौत पुलिस के लिए एक बड़ी ससफलता है, जिसका जश्न उसे जरूर मनाना चाहिए.
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Vikas Dubey मामले से मेल खाती है 'लॉरेंस' से ज्यादा खतरनाक Aman Sahu के एनकाउंटर की स्क्रिप्ट!