Dehuli Massacre: उत्तर प्रदेश में एक ऐसे हत्याकांड में कोर्ट ने 44 साल बाद फैसला सुनाया है, जिसे देश के सबसे नृशंस नरसंहार में से एक माना जाता है. फिरोजाबाद जिले (घटना के समय जिला मैनपुरी) के दिहुली गांव में 24 दलितों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. साल 1981 में पूरे देश को हिला देने वाले इस मामले की तुलना चंबल के बीहड़ों में होने वाले नरसंहारों से की गई थी. मैनपुरी की एक कोर्ट ने अब इस नरसंहार के 17 में से 3 आरोपियों कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को दोषी माना है, जिन्हें 18 मार्च को सजा सुनाई जाएगी. मामले के 13 आरोपियों की इन 44 साल के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि फरार चल रहे एक आरोपी ज्ञानचंद्र को एडीजे (विशेष डकैती प्रकोष्ठ) इंद्रा सिंह की कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया है. 

पहले जान लीजिए क्या था दिहुली नरसंहार
फिरोजाबाद शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर जसराना कस्बे के करीब दिहुली गांव मौजूद है. इस गांव में 18 नवंबर, 1981 का दिन जाटव मोहल्ले के लोगों के लिए काल बनकर आया. पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, घटना के दिन शाम 4.39 बजे के करीब 14 लोग पुलिस की वर्दी में दलित बहुल दिहुली गांव में पहुंचे. उन्होंने पूरे जाटव मोहल्ले को घेर लिया और सामने पड़ने वाले हर शख्स को गोली मारनी शुरू कर दी. इन वर्दीधारियों ने करीब चार घंटे तक यह तांडव मचाया और इसके बाद फरार हो गए. BBC की रिपोर्ट में घटना के चश्मदीद राकेश कुमार के हवाले से बताया गया कि हर तरफ गोलियां चल रही थीं. मैं पुवाल के ढेर में छिप गया और गोली चलनी बंद होने के बाद निकला तो कई लोगों को गोली लगी हुई थी. राकेश उस समय महज 14 साल के थे और प्राइमरी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ते थे. राकेश की मां चमेली देवी के भी पैर में गोली लगी थी. उस समय 35 साल की रहीं चमेली देवी अब 80 साल की हैं. वे घटना को याद करते हुए बताती हैं कि हमला करने वालों ने औरतों-बच्चों किसी को भी नहीं बख्शा, जो सामने पड़ा, उसे गोली मार दी. पुलिस रीब 4 घंटे बाद मौके पर पहुंची, तब तक हमलावर भाग चुके थे.

ट्रैक्टर में लादकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने पड़े शव
घटना के एक अन्य चश्मदीद भूप सिंह के मुताबिक, इतने लोग इस गोलीकांड में मारे गए थे कि उनके शवों को पुलिस पूरी रात जमा करती रही. अगले दिन सुबह ट्रैक्टर-ट्रालियों में लादकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए मैनपुरी भेजा गया, जहां 4 डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम किया था. पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, इस हत्याकांड में 24 दलितों की मौत हुई थी. 

दलित डकैत का अगड़ी जाति की महिला से याराना बना कारण
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में इस हत्याकांड का कारण एक डकैत गिरोह की अंदरूनी जातीय रंजिश बताया था. अगड़ी जाति के संतोष, राधे के डकैत गिरोह में दलित जाति का कुंवरपाल भी शामिल था. कुंवरपाल का याराना एक अगड़ी जाति की महिला से था. कुंवरपाल की हत्या हो गई. इसका आरोप संतोष और राधे पर लगा. पुलिस ने जाटव समुदाय के तीन लोगों की गवाही के आधार पर संतोष-राधे गैंग के दो सदस्यों को कुंवरपाल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, इसके चलते ही संतोष-राधे गैंग जाटव समुदाय से नाराज था और दिहुली में जाटव परिवारों का नरसंहार उसी का नतीजा था. 

पूरे सिस्टम को हिला दिया था नरसंहार ने
नरसंहार के समय की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नृशंस घटना ने पूरे सिस्टम को हिला दिया था. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह और केंद्र में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थे. नेता विपक्ष बाबू जगजीवनराम थे. विपक्ष ने इस हत्याकांड को सरकार की नाकामी बताया था. सभी ने दिहुली गांव के दौरे भी किए थे. दिहुली गांव से घटना के बाद दलित समुदाय पलायन कर गया. इसके बाद गांव में पीएसी प्लाटून तैनात की गई. पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने भी लंबे समय तक गांव में कैंप किया. तब दलित परिवार वापस लौटे थे. 

44 साल तक केस इधर से उधर घूमता रहा
यह केस 44 साल तक कानूनी दांवपेच में फंसकर इधर से उधर चक्कर काटता रहा. मैनपुरी कोर्ट में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की संभावना देखकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केस को साल 1984 में इलाहाबाद सेशन कोर्ट में ट्रांसफर करा लिया. अक्टूबर, 2024 तक वहीं सुनवाई चलती रही. फिरोजाबाद से लंबी दूरी होने के कारण केस में सही तरह से पैरवी नहीं हुई और यह लटकता चला गया. अक्टूबर, 2024 में इसे दोबारा मैनपुरी की स्पेशल डकैती कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया. इसके बाद ट्रायल में तेजी आई और अब इस केस में फैसला आ गया है.

इन धाराओं में दोषी घोषित हुए हैं अब आरोपी
अभियोजन पक्ष के वकील रोहित शुक्ला ने बताया, 'कोर्ट ने इस मामले में जिंदा बचे तीनों अभियुक्तों को दोषी माना है. उन्हें धारा 302 (हत्या), धारा 307 (हत्या के प्रयास), धारा 216 (अभियुक्तों को शरण देना), धारा 120B (आपराधिक साज़िश), धारा 449-450 (घर में घुसकर अपराध करना) के तहत दोषी माना गया है.' इस मामले में दोषी घोषित तीनों अभियुक्तों में कप्तान सिंह जमानत पर रिहा था और अदालत में पेश हुआ था, जबकि रामसेवक इस समय मैनपुरी जेल में बंद हैं. उसे भी अदालत में पेश किया गया था. तीसरे अभियुक्त रामपाल ने हाजिरी से माफी मांगी थी, उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए हमारे गूगलफेसबुकxइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से जुड़ें.

Url Title
dehuli massacre how 44 years back 24 dalit people horror killing by so called dacoits now court convicted 3 criminal know everything firozabad killing read all explained
Short Title
क्या था यूपी का दिहुली नरसंहार, 44 साल पहले कैसे चंबल के बीहड़ों की तरह हुई थी 2
Article Type
Language
Hindi
Page views
1
Embargo
Off
Image
Image
Dihuli Massacre
Date updated
Date published
Home Title

क्या था यूपी का दिहुली नरसंहार, 44 साल पहले कैसे चंबल के बीहड़ों की तरह हुई थी 24 लोगों की 'हॉरर किलिंग', जानें सबकुछ

Word Count
896
Author Type
Author