चैंपियंस ट्रॉफी, 2025 की शुरुआत होने वाली है. भारतीय टीम का पहला मुकाबला 19 फरवरी को बांग्लादेश से होगा. इसके बाद 23 फरवरी को पाकिस्तान से भिड़ंत होगी. पाकिस्तान से मुकाबला हो तो माहौल में गरमाहट आ ही जाती है. इस गरमाहट को और बढ़ा रहे हैं टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी. दरअसल, चैंपियंस ट्रॉफी के एक प्रोमो वीडियो में माही कह रहे हैं कि इस बार 2017 की हार का बदला लेना है.आइए जानते हैं कि 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी में ऐसा क्या हुआ था जिसका बदला लेने के लिए माही इतने बेताब हैं.
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2017 की चैंपियंस ट्रॉफी में भारत और पाकिस्तान की टीमें फाइनल में पहुंची थीं. किसी ने ये अनुमान नहीं लगाया था कि पाकिस्तान फाइनल तक पहुंच पाएगा. एक तो वो टूर्नामेंट में सबसे कम रैंकिंग वाली टीम थी. दूसरा, पहले ही मैच में पाक टीम को भारत ने बुरी तरह हराया था. जब ये दोनों फाइनल में पहुंचीं तो टीम इंडिया के चैंपियन बनने की भविष्यवाणियां होने लगीं. इसकी वजह भी थी. भारतीय टीम छह साल में चौथी बार आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची थी. भारत के बल्लेबाज जबरदस्त फॉर्म में थे और सेमीफाइनल में बांग्लादेश को एकतरफा मुकाबले में 9 विकेट से हराने के बाद टीम का आत्मविश्वास बुलंदियों पर था. हालांकि, जब मैच की शुरुआत हुई तो पहले 8-10 ओवर में ही लगने लगा कि भारत के लिए ट्रॉफी जीतना आसान नहीं होने वाला है. आश्चर्य यह भी था कि एक्सपर्ट्स पाक टीम के गेंदबाजों से अच्छे प्रदर्शन का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन हुआ इसका उल्टा. पाक बल्लेबाजों ने 50 ओवर में 338 रनों का विशाल स्कोर खड़ाकर भारत को बैकफुट पर ऐसा धकेला कि गेंदबाजों को ज्यादा कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ी. इसका नतीजा हुआ कि 180 रनों के विशाल अंतर से भारत को हराकर पाकिस्तान पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी जीतने में सफल रहा.
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लंदन के द ओवल ग्राउंड पर खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत के लिए टॉस के अलावा कुछ भी अच्छा नहीं रहा. कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर फील्डिंग चुनी. चौथे ओवर में जसप्रीत बुमराह की गेंद पर फखर जमां विकेट के पीछे लपके गए, लेकिन अंपायर ने इसे नो बॉल करार दिया. इसके बाद बुमराह की लय ऐसी बिगड़ी कि वे अपनी लाइन-लेंथ ढूंढते ही रह गए. फखर ने उनके पहले तीन ओवर में 24 रन ठोक दिए तो दूसरी छोर पर अजहर अली ने रविचंद्रन अश्विन की अच्छी-खासी खबर ली. अश्विन के पहले चार ओवर में 28 रन बने. इन दोनों बल्लेबाजों, खासकर फखर जमां ने कई बार गलत शॉट खेले, गेंद फील्डर्स के बीच में गिरी, लेकिन उन्होंने शॉट्स खेलना नहीं छोड़ा. अपनी चौथी वनडे पारी खेल रहे जमां ने 106 गेदों पर 114 रन की पारी खेली. इसके बाज रही-सही कसर मोहम्मद हफीज ने पूरी कर दी. हफीज ने 37 गेंद पर 57 रन ठोककर स्कोर को 300 के पार पहुंचा दिया.
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अब बारी भारत के बल्लेबाजों की थी. पाकिस्तान ने 338 रन बनाए जरूर थे, लेकिन बल्लेबाजों के फॉर्म को देखकर लग रहा था कि टीम इंडिया इस स्कोर को चेज कर सकती है. इन उम्मीदों को मोहम्मद आमिर ने पहले 9 ओवर में ही खत्म कर दिया. आमिर ने रोहित शर्मा को 0, शिखर धवन को 21 और विराट कोहली को 5 रन पर आउट कर टीम इंडिया के बैटिंग ऑर्डर की धज्जियां बिखेर दीं. 17वें ओवर में जब केदार जाधव आउट हुए तब भारत का स्कोर 6 विकेट पर 72 रन था. इसके बाद हार्दिक पांड्या ने अपने तेवर दिखाए और रविंद्र जडेजा के साथ 80 रन की ताबड़तोड़ साझेदारी कर उम्मीदें जगाईं. तभी जडेजा की एक गलती से पांड्या रन आउट हो गए और पूरी भारतीय टीम 30.3 ओवर में 158 रन पर ही ढेर हो गई. चैंपियन बनने के बाद जब पाकिस्तानी टीम अपने देश पहुंची तो उनका विश्व विजेताओं की तरह स्वागत हुआ. दूसरी ओर, टीम इंडिया के लिए इसके बाद मुश्किलों का दौर शुरू हो गया. कप्तान विराट कोहली से अनबन के चलते कोच अनिल कुंबले ने इस्तीफा दे दिया. महेंद्र सिंह धोनी भी इस टीम का हिस्सा थे, लेकिन उनका कुछ खास योगदान नहीं रहा था. अजहर अली को रन आउट करने के अलावा उन्होंने बैटिंग करते हुए केवल 4 रन बनाए थे. उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिए करीब 5 साल हो चुके हैं, लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में मिली हार की टीस शायद माही अब भी नहीं भूले हैं.
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पाकिस्तान से किस बदले की बात कर रहे धोनी, Champions Trophy 2017 के फाइनल का है मामला