डीएनए हिंदी: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (Electric vehicle) मांग धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है. देश में पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की बढ़ती दरों को देखते हुए अब उपभोक्ता ईवी खरीदने के बारे में सोचने लगे हैं. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) का अनुमान है कि वर्ष 2025-26 तक अकेले भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री का बाजार करीब 3 लाख करोड़ रूपये का हो जाएगा. क्रिसिल का कहना है कि कारोबार के इन अवसरों में मूल उपकरण मैन्युफैक्चरर के लिये विभिन्न वाहन सेगमेंट्स में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये और और वाहनों का वित्तपोषण (फाइनेंस) करने वालों के लिये लगभग 90,000 करोड़ रुपये की संभावित आय शामिल है.
दो पहिया ईवी की बढ़ी बिक्री
क्रिसिल का कहना है कि ईवी सेक्टर के ग्रोथ में दो पहिया वाहन मुख्य भूमिका निभाएंगे. हाल के एक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 तक दो पहिया ईवी की बिक्री में तीन गुणा बढ़ोतरी दर्ज की गई. ऑटो डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में कुल 4.29 लाख ईवी की बिक्री दर्ज की गई. वर्ष 2021-22 में करीब 1.35 लाख ईवी की बिक्री हुई थी.
पेट्रोल-डीजल के बढ़ रही कीमतों से आएगी तेजी
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर ईवी खरीदने की चाहत में इजाफा देखा जा रहा है. ईवी को लेकर सरकार भी कई तरह की स्कीम पेश कर रही है जिसके चलते भी इसमें बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी. क्रिसिल के अनुसार, कारोबारी साल 2025-26 तक EV मामले में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत, तिपहिया के संदर्भ में 25 से 30 प्रतिशत और कार तथा बसों के मामले में पांच प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों स्वीकार्यता में तेजी बनी रहेगी क्योंकि लोग अब पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों की जगह ईवी को तरजीह दे रहे हैं.
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