आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) एक सरकारी दस्तावेज है, जिसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार किया जाता है. इसमें देश की अर्थव्यवस्था का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है, जिसमें GDP, महंगाई, रोजगार, वित्तीय घाटा जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े शामिल होते हैं. यह रिपोर्ट सरकार को आगामी बजट तैयार करने में मदद करती है, साथ ही नागरिकों, व्यापारियों और निवेशकों को देश की आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी देती है.
आर्थिक सर्वेक्षण और बजट का संबंध
आर्थिक सर्वेक्षण हर साल केंद्रीय बजट से एक दिन पहले प्रस्तुत किया जाता है. इसका मुख्य कारण है:
- आर्थिक स्थिति की स्पष्टता: यह रिपोर्ट मौजूदा स्थिति का सही आकलन करती है, जिससे बजट के फैसले सही जानकारी पर आधारित होते हैं.
- सामाजिक और आर्थिक समस्याएं: बेरोजगारी, महंगाई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सर्वेक्षण में उजागर किया जाता है, जिन पर बजट में ध्यान दिया जा सकता है.
- नीति बनाने में मदद: सर्वेक्षण से पहले इस पर चर्चा होती है, जिससे बजट की तैयारी में बेहतर विचार-विमर्श होता है.
- वित्तीय रणनीति: सर्वेक्षण के सुझावों से सरकार को अपनी वित्तीय प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिलती है.
आर्थिक सर्वेक्षण में कौन से प्रमुख बिंदु होते हैं?
- आर्थिक सर्वेक्षण में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की जाती है:
- GDP वृद्धि: देश की आर्थिक प्रगति का आकलन.
- महंगाई दर: वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, जो उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को प्रभावित करता है.
- रोजगार और बेरोजगारी: नौकरी सृजन और श्रम बाजार की स्थिति की जांच.
- वित्तीय घाटा: सरकार की आय और खर्च में अंतर का मूल्यांकन.
- क्षेत्रीय प्रदर्शन: कृषि, उद्योग और सेवाओं का विश्लेषण.
- सामाजिक विकास: स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे में प्रगति.
- बाहरी कारक: वैश्विक व्यापार, विदेशी मुद्रा भंडार और अन्य बाहरी प्रभावों की समीक्षा.
आर्थिक सर्वेक्षण का इतिहास
आर्थिक सर्वेक्षण की शुरुआत 1950-51 में हुई थी, और 1964 में इसे बजट से अलग किया गया. तब से यह हर साल स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत किया जाता है. अब यह सरकार की नीतियों को समझने और देश की वित्तीय योजना को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है.
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आर्थिक सर्वेक्षण की तैयारी कौन करता है?
यह सर्वेक्षण आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार किया जाता है, जिसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की टीम का अहम योगदान होता है. रिपोर्ट में विभिन्न सरकारी विभागों, शोध संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से डेटा लिया जाता है. रिपोर्ट के तैयार होने के बाद, इसे वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है. उसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसके प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा करते हैं.
देश की आर्थिक स्थिति और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी
आर्थिक सर्वेक्षण केंद्रीय बजट से पहले पेश किया जाता है ताकि सरकार को आगामी वित्तीय वर्ष की योजना बनाने में मदद मिल सके. यह रिपोर्ट न केवल नीति निर्माताओं को दिशा देती है, बल्कि आम नागरिकों को भी देश की आर्थिक स्थिति और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करती है.
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