Bangladesh News: बांग्लादेश सरकार ने एक पुलिस रिपोर्ट के हवाले से शनिवार को दावा किया कि पिछले साल 4 अगस्त के बाद से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ अधिकांश घटनाएं 'राजनीतिक प्रकृति' की थीं, न कि 'सांप्रदायिक'. हालांकि, यह दावा सवालों के घेरे में है, क्योंकि हिंसा की अधिकांश घटनाओं में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोग पीड़ित हुए हैं. बांग्लादेश पुलिस ने सांप्रदायिक हिंसा की शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन डेस्क और व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया है.
रिपोर्ट के हवाले से कर रहे दावा
मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के कार्यालय ने बताया कि यह जांच उस दावे के बाद शुरू हुई है, जिसमें बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने कहा था कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त को देश छोड़ने से पहले सांप्रदायिक हिंसा की 2,010 घटनाएं हुई थीं. हालांकि, बांग्लादेश पुलिस की जांच में पाया गया कि इनमें से अधिकांश घटनाएं 'राजनीतिक' प्रकृति की थीं और केवल 20 घटनाएं सांप्रदायिक हिंसा के रूप में दर्ज की गईं.
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इतने मामले हुए दर्ज
पुलिस ने अब तक 62 मामले दर्ज किए हैं और 35 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा, सांप्रदायिक हिंसा की शिकायतों को लेकर पुलिस ने एक व्हाट्सएप नंबर और हेल्पलाइन डेस्क शुरू की है. बांग्लादेश सरकार ने यह भी घोषणा की है कि वह किसी भी सांप्रदायिक हमले के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाएगी और दोषियों को गिरफ्तार कर सजा दिलवाएगी. हाल ही में हुए हमलों में हिंदू धर्म से संबंधित व्यक्तियों और उनके धार्मिक स्थलों पर हमले भी हुए हैं, जिससे भारत ने अपनी चिंता जताई है. इस बीच भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से इन घटनाओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
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'राजनीतिक कारण था, न कि सांप्रदायिक', अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा पर बोली बांग्लादेश की सरकार