डीएनए हिंदी: पाकिस्तान में कुछ ही दिन में चुनाव होने वाले हैं और इस लिहाज से लगातार राजनीतिक हलचल हो रही है. पूर्व पीएम इमरान खान जेल में हैं जबकि राजनीतिक हिंसा भी हो रही है. हालांकि, क्या आप जानते हैं कि जैसे भारत में दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से जाता है उसी तरह से पड़ोसी देश में भी एक यूपी है. दरअसल संख्या बल और सीटों के लिहाज से पंजाब प्रांत बेहद महत्वपूर्ण है. पाकिस्तान में माना जाता है कि सरकार उसी की बनती है जिसके साथ पंजाब होता है. अब देखना है कि 8 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में इस बार पड़ोसी देश में सत्ता की चाबी आखिरकार किसके हाथ लगती है.
पाकिस्तान में 8 फरवरी, 2024 को 14 वां आम चुनाव होना है. 24 करोड़ की आबादी वाले देश में अब तक चुनाव को लेकर काफी हंगामा होता रहा है. हर बार इन आम चुनावों से पहले कई हिंसक घटनाएं होती हैं. पाकिस्तान में चुनावों की निष्पक्षता पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी सवाल उठा चुके हैं. आम धारणा यह भी है कि बिना सेना के समर्थन के वहां किसी भी सरकार का चलना नामुमकिन है. आर्मी ही बैकडोर से सरकार चलाती है और उनके हाथ में पूरा नियंत्रण रहता है.
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पंजाब प्रांत के पास हैं सबसे ज्यादा सीटें
पाकिस्तान के चार प्रांत पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तुनख्वा हैं. पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली में कुल 342 सीटें हैं. पंजाब में 141 सीटें हैं और इस लिहाज से सत्ता के लिए यह सबसे अहम प्रदेश है. साथ ही, पंजाब आर्थिक क्षेत्र के लिहाज से भी देश की राजनीति में अहम है. यही वजह है कि पंजाब को पाकिस्तान की सत्ता का एंट्री गेट माना जाता है. इसके अलावा, देश में 60 सीटें महिलाओं के लिए और 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए रिजर्व हैं.
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नवाज शरीफ की पार्टी की बढ़त दिख रही पंजाब में
पंजाब में सीटों के लिहाज से इस वक्त नवाज शरीफ की पार्टी आगे दिख रही है. PML-N को साल 2018 के चुनाव में कुल 64 सीटों पर जीत मिली थी. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-एइंसाफ (PTI) ने यहां से कुल 67 सीटों पर जीत मिली थी. इस चुनाव में पीटीआई की हालत ठीक नहीं है और इमरान खान जेल में है. बिलावल भुट्टो की पार्टी पीपीपी की हालत पंजाब में कमजोर है. पीपीपी का गढ़ सिंध प्रांत मना जाता है और वहां उनकी प्रांतीय सरकार भी है.
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