बाग्लादेश में भड़की हिंसा के बाद देश छोड़कर भागी पूर्व पीएम शेख हसीना की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. शेख हसीना ने बाग्लादेश छोड़कर भारत की शरण ली थी, लेकिन अब हो सकता है कि उन्हें वापस बाग्लादेश लौटना पड़े. दरअसल बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने ऐसा कदम उठाया है जिससे शेख हसीना मु्सीबतों में पड़ती नजर आ रही है.
शेख हसीना पर लगा ये आरोप
दरअसल बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों को लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. गिरफ्तारी वारंट इंटरनेशनल क्राइम ट्रीब्यूनल (बांग्लादेश) की ओर से जारी किया गया है. कोर्ट ने उनको 18 नवंबर को पेशी का आदेश दिया है. वर्तमान में, शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं, और यह मामला दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है.
इसी साल हुआ था आंदोलन
जानकारी के अनुसार, इन आरोपों में हसीना पर छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार होने का आरोप है. आपको याद होगा कि इसी साल आरक्षण के नाम पर बाग्लादेश में छात्र आंदोलन शुरू हुआ था. ये आंदोलन कब हिंसा में बदल गया कोई भी नहीं समझ पाया.
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आंदोलन में गुई सैकड़ों मौतें
ये आंदोलन इतना भयानक हो चुका था कि इसमे सैकड़ों लोगों की जान चली गई वहीं पीएम शेख हसीना की कुर्सी चली गई. देश की पूर्व पीएम शेख हसीना बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर भारत भाग आई थी. अब जब उन पर मुकदमा दायर किया गया है तो शेख हसीना की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. ये भी हो सकता है कि शेख हसीना को वापस अपने देश जाना पड़े.
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