Chaiti Chhath Puja: हिंदू धर्म में छठ एक महापर्व है, बिहार से लेकर पर्वाचल इलाकों में इस व्रत का बड़ा महत्व है. इसी तरह हर चैत्र नवरात्रि के बीच ही चैती छठ मनाया जाता है. चैती छठ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि से शुरू होता है. इसका समापन सप्तमी तिथि को होता है. वहीं इसके अगले दिन पारण किया जाता है. चैती छठ पर्व की पूजा विधि और नियम कार्तिक माह में पड़ने वाली छठ पूजा के जैसी ही होती है. चैती और कार्तिक दोनों ही छठ पूजा में 36 घंटे का निर्जला व्रत संकल्प किया जाता है. आइए जानते हैं कि इस बाद चैती छठ पूजा व्रत की शुरुआत तारीख से लेकर नियम, पूजा सामग्री और समापन से लेकर पारण की तिथि...
इस दिन है चैती छठ पूजा व्रत (Chhath Puja Vrat)
छठ महापर्व की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है. इसके बाद खरना और इसके अगले दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है. इसके बाद ऊषा अर्घ्य साथ ही इस महापर्व का समापन हो जाता है. इस साल चैती छठ 1 अप्रैल 2025 मंगलवार से शुरू होकर 4 अप्रैल 2025 शुक्रवार के दिन उगते सूर्य को जालकर देने के साथ समापन होगा. इसमें 1 अप्रैल को नहाय खाय, दूसरे दिन यानी 2 अप्रैल को खरना, 3 अप्रैल 2025 डूबते सूर्य को जल और 4 अप्रैल यानी आखिरी दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इसी दिन महाव्रत का पारण किया जाएगा.
ये हैं छठ पूजा के नियम (Chhath Puja Niyam)
अगर आप भी छठ पूजा कर रहे हैं तो इस व्रत में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें. इस व्रत को करने के बहुत ही कड़े नियम हैं. यही वजह है कि व्रत का संकल्प लेने से पहले इन्हें जान लेना ज्यादा जरूरी है. छठ पूजा के समय घर के सभी सदस्यों को सात्विक भोजन ग्रहण करना होता है . नहाय-खाय के दिन से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक लहसुन और प्याज का सेवन भूलकर भी न करें. व्रती को ही छठ माता का प्रसाद तैयार करना होता है. हालांकि आप इसमें किसी की मदद ले सकते हैं. प्रसाद बनाते समय स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें. छठ पूजा का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही तैयार होगा. इस दौरान भूलकर भी अखंडित वस्त्र धारण किए जाएं, अगर साड़ी पहनी जाएगी तो उसमें कोई कचाई छटाई या फॉल का काम नहीं होगा.
चैती छठ पूजा सामग्री (Chaiti Chhath Puja Samagri)
थाली, दीपक, खाजा, गुड़, अदरक का पौधा
चावल, आटा, जल, शहद, गंगाजल, चंदन
सिंदूर, धुपबत्ती, कुमकुम, कपूर, मिट्टी के दीए
बांस या पीतल का सूप, दूध और जल के लिए गिलास
ऋतुफल, कलावा, सुपारी, फूल और माला
सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे का कलश, बड़ी टोकरी
प्रसाद की सामग्री (Prasad Samagri)
चम्मच, लड्डू, हल्दी, नाशपाती,
पत्ते लगे हुए ईख, दूध, तेल और बाती, नारियल
शरीफा, दूध से बनी मिठाइयां, बड़ा वाला नींबू
सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंदी, मूली, बैंगन, केले, गेहूं
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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चैती छठ का व्रत रख रहे हैं तो इन बातों पर दें विशेष ध्यान, जानें इसकी तारीख से लेकर नियम, पूजा सामग्री और विधि