चंद्र ग्रहण के बाद अब सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. मार्च महीने में चंद्र ग्रहण के ठीक 16 दिन बाद सूर्य ग्रहण लगेगा. क्यों इस ग्रहण को लेकर चिंता जताई जा रही है और पहले जब भी एक ही महीने में 2 ग्रहण पड़े हैं तो इसका क्या असर देश-दुनिया पर पड़ा है, चलिए जानें.
दूसरा ग्रहण, सूर्य ग्रहण, 29 मार्च को होगा. हिंदू धर्म में, दोनों ग्रहण, चाहे सूर्य या चंद्र, अशुभ माने जाते हैं. पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को घटित होगा. यह सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण है और रात्रि में घटित होगा. इसलिए यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. पहला सूर्यग्रहण यूरोप, रूस और अफ्रीका में दिखाई दिया. दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 को होगा और यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा. दूसरा सूर्यग्रहण न्यूजीलैंड, प्रशांत महासागर और अंटार्कटिका में दिखाई देगा.
2022 में 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण और 8 नवंबर को चंद्र ग्रहण होगा. 1979 में 22 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 6 सितंबर को चंद्र ग्रहण हुआ था. इस साल भी यही स्थिति है. इससे पहले 2022 और 1979 में दुर्घटनाएं हुई थीं और इन दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान चली गई थी. इन दोनों आपदाओं में एक बात समान है, वह है सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण.
2022 में घटित दुर्घटनाएं
इससे पहले 2022 में 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण और 8 नवंबर को चंद्र ग्रहण लगा था. रविवार, 30 अक्टूबर 2022 को गुजरात के मोरबी में माछू नदी पर बना सस्पेंशन ब्रिज ढह गया. उस समय पुल पर लगभग 500 लोग मौजूद थे. पुल ढह गया और वहां मौजूद लोग नदी में गिर गए. इस दुर्घटना में 190 लोगों की जान चली गई.
1979 में भी एक दुर्घटना घटी
43 साल पहले 11 अगस्त 1979 को मोरबी में बांध टूट गया था, जिससे बाढ़ आ गई थी और हजारों लोग मारे गए थे. उसी वर्ष 22 अगस्त को सिंह राशि में सूर्य ग्रहण हुआ. इसके बाद 6 सितम्बर को कुम्भ राशि में चन्द्रग्रहण हुआ. अक्टूबर 1979 में फिलीपींस में आए तूफान के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि हुई. 2022 में भी ऐसी ही दुर्घटना घटी.
ज्योतिष ग्रंथ बृहत्संहिता में ग्रहण के बारे में भविष्यवाणियां
2022 और 1979 में घटित इन दोनों त्रासदियों में एक बात समान है कि उस वर्ष सूर्य या चंद्र ग्रहण था. ज्योतिष ग्रंथ बृहत्संहिता में ग्रहण के बारे में भविष्यवाणियां की गई हैं. इस पुस्तक में कहा गया है कि जब एक ही महीने में दो ग्रहण होंगे तो दुनिया में आपदाएं आएंगी और उन आपदाओं में लोग मारे जाएंगे.
बृहत संहिता के अनुसार दो ग्रहणों का प्रभाव
वराहमिहिर द्वारा रचित 'बृहत्संहिता के राहुचराध्याय' ग्रंथ में लिखा है कि जब एक ही माह में दो ग्रहण एक साथ पड़ते हैं तो तूफान, भूकंप और मानवीय भूल के कारण बड़े पैमाने पर जनहानि होने की संभावना रहती है. यदि एक ही माह में सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण घटित होता है तो सैन्य गतिविधियां बढ़ जाती हैं. सरकारों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है. प्राकृतिक आपदाओं की संभावना है.
ग्रहण योग का व्यापक प्रभाव पड़ेगा
वैश्विक परिप्रेक्ष्य से, इस अवधि के दौरान ग्रहों का प्रभाव दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है. राष्ट्रपतियों के बीच मौखिक युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के दृष्टिकोण से बहुत सारी नकारात्मक खबरें हो सकती हैं, लेकिन महिलाओं के लिए पद और प्रतिष्ठा हासिल करने का यह अच्छा समय है. यह अवधि बुद्धि, नई खोजों और व्यापार की दृष्टि से शुभ रहेगी.
हेल्थ खराबी से लेकर आपसी मतभेद तक बढ़ाएंगे
ग्रहण के बाद के तीन महीनों के दौरान आम जनता के स्वास्थ्य में गिरावट, सुख में कमी, नए रोगों के उभरने या उभरने के कारण खुशी में कमी, आपसी मतभेद और शत्रुता तथा राजनीतिक दलों के बीच कटुता हो सकती है. कोई बड़ा वाहन दुर्घटना का कारण बन सकता है. भारतीय रुपए का अवमूल्यन हो सकता है. यह व्यापार के लिए अच्छा समय होगा. आर्थिक दृष्टि से यह समय अच्छा रहेगा तथा बौद्धिक दृष्टि से भी यह समय अच्छा रहेगा.
ग्रहण का शुभ प्रभाव
रोजगार में वृद्धि होगी. आय में वृद्धि होगी.
यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ होगा. खाद्यान्न की कीमतें सामान्य रहेंगी.
ग्रहण का अशुभ प्रभाव
- आग दुर्घटना, भूकंप, गैस दुर्घटना, विमान दुर्घटना जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावना.
- राजनीतिक अस्थिरता रहेगी, यानि दुनिया भर में राजनीतिक माहौल बहुत उथल-पुथल रहेगा.
- दुनिया भर की सीमाओं पर तनाव शुरू हो जाएगा.
- दुर्घटना, आगजनी एवं तनाव की संभावना.
- विरोध प्रदर्शन, धरना, हड़ताल, बैंक घोटाले, विमान दुर्घटनाएं, विमान में खराबी और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होंगे.
- राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और अधिक बढ़ेंगे. सत्ता संरचना में परिवर्तन होंगे. मनोरंजन, फिल्म, खेल और गायन क्षेत्र से आपको बुरी खबर मिलेगी.
- बड़े नेताओं के बारे में दुखद समाचार मिलने की संभावना है.
बुरे परिणामों से बचने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
- पूजा-पाठ और दान-पुण्य करें.
- हनुमान की पूजा करनी चाहिए. हनुमान चालीसा का पाठ करें.
- भगवान शिव और देवी दुर्गा की पूजा की जानी चाहिए.
- महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.
2025 में होने वाले ग्रहण
2025 में चार ग्रहण दिखाई देंगे. इनमें से दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे. पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा. पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च 2025 को हुआ था. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण था. यह चंद्र ग्रहण धुलंडी यानि होली के दिन लगा, लेकिन चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं दिया, इसलिए इस चंद्र ग्रहण का भारत में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. यह चन्द्र ग्रहण यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और प्रशांत क्षेत्र में दिखाई दिया.
दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को होगा. यह चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष की शुरुआत में लगेगा और भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य होगा.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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सूर्य ग्रहण 2025 के प्रभाव
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