साल 2025 की शुरुआत में ही सर्दी में गर्मी का एहसास होने लगा है. ऐसे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमएडी) ने भविष्यवाणी की है कि जनवरी के गर्म और शुष्क रहने के बाद, फरवरी में भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. साथ ही सूखे का प्रकोप की भी संभावनाएं हैं.
कम बारिश की संभावना
आईएमडी का अनुमान है कि फरवरी में बारिश 22.7 मिमी की लंबी अवधि के औसत (1971-2020) के 81 प्रतिशत से कम होने की संभावना है. वहीं, पश्चिम-मध्य, प्रायद्वीपीय और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. यह जानकारी आईएमडी के महानिदेश मृत्युंजय महापात्र ने साझा की है. कहा जा रहा है कि उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में फरवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है. इसी तरह, पश्चिम-मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है.
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फसलों के लिए जरूरी बारिश
जनवरी और मार्च के बीच उत्तर भारत में बारिश सामान्य से कम होने के बारे में पहले बताया गया था. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी राज्य सर्दियों (अक्तूबर से दिसंबर) में गेहूं, मटर, चना और जौ जैसी रबी फसलों की खेती करते हैं और गर्मियों (अप्रैल से जून) में उनकी कटाई करते हैं. मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ के कारण होने वाली सर्दियों की बारिश इन फसलों की बढ़ोतरी के लिए महत्वपूर्ण है. अब अगर बारिश कम होगी तो फसलों पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे महंगाई भी बढ़ेगी.
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