डीएनए हिंदी: पराली जलाने की समस्या ऐसी है जो साल दर साल तमाम प्रयासों के बावजूद खत्म नहीं हो रही है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगाया, सरकारों ने पुलिस लगाई फिर भी पराली जलाने के सैकड़ों-हजारों मामले इस बार भी सामने आए हैं. नतीजा यह है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले पर सुनवाई की. पराली जलाए जाना न रुकने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि पंजाब और अन्य राज्यों के उन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लाभ से वंचित किया जाए जो रोक के बावजूद पराली जला रहे हैं.
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने की मांग को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के जज संज किशन कौल और सुधांशु धूलिया की बेंच ने सुनवाई की. इसी सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने कहा, 'मेरे विचार में पराली जलाने वाली किसानों से MSP पर कोई फसल क्यों खरीदी जानी चाहिए?' उन्होंने सुझाव दिया कि जिन लोगों की पहचान पराली जलाने वालों के तौर पर हुई है उन्हें MSP पर फसल बेचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
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'सरकार ले नीतिगत फैसला'
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी किसी भी एक राज्य सरकार या केंद्र के बारे में नहीं है. जस्टिस धूलिया ने यह सुझाव दिया कि जो किसान पराली जलाएं उनके धान उगाने पर भी रोक लगाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि किसानों के पास पराली जलाने को लेकर कोई मजबूरियां भी रही होंगी, ऐसे में इस पर विचार करना जरूरी है. हम सिर्फ सुझाव दे रहे हैं, इस पर नीतिगत निर्णय लेना सरकार के विवेक पर है.
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सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा है, 'हमने पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और ऐसे लोगों से कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला है. पंजाब सरकार ने 618 रेड एंट्री भी बनाई हैं जो किसानों को उनकी जमाबंदी में लाभ लेने से रोकती हैं. पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ लगभग 1 हजार एफआईआर दर्ज की गई हैं. पंजाब में 6 जिले पूरी तरह से पराली की आग से मुक्त हो चुके हैं.'
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'पराली जलाने वालों को ना दें MSP', सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही ऐसी बात