सुप्रीम कोर्ट 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में गुजरात सरकार और कई अन्य दोषियों की दायर अपील पर 13 फरवरी को सुनवाई करेगा. जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि अगली सुनवाई पर इस मामले में अब कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा. जस्टिस महेश्वरी ने कहा कि इस मामले को पिछले एक साल में 5 बार स्थगित किया जा चुका है.

दरअसल, गुरुवार को सुनवाई के दौरान एक दोषी के ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उन्होंने कोई सबूत रिकॉर्ड में नहीं रखा है. इसके लिए उनको कुछ समय की मोहलत दी जाए. इस पर जस्टिस जेके माहेश्वरी ने सख्त लहजे में कहा, ‘हमें नहीं पता. हम मामले की सुनवाई करेंगे और हमने पहले भी यह स्पष्ट किया था. हम इस मामले को स्थगित नहीं करेंगे. इस मामले को कम से कम पांच बार स्थगित किया जा चुका है. पिछले एक साल से मैं इस मामले को स्थगित कर रहा हूं.’ 

वकील ने कोर्ट को बताया कि कुछ दोषियों ने माफी के लिए याचिका दायर की है, जो लंबित है. मामले को स्थगित करने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा, 'हमें चीफ जस्टिस से निर्देश मिले हैं कि आपराधिक अपील और माफी के मामलों की एक साथ सुनवाई करने की जरूरत नहीं है.'

मामले को 22 साल बीत चुके
दोषियों में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा, मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने के खिलाफ गुजरात की अपील पर पहले सुनवाई होनी चाहिए. हेगड़े ने कहा कि इस मामले को 22 साल बीत चुके हैं. मेरे मुवक्किलों को मृत्युदंड नहीं दिया गया है. पीठ को पहले दोष की पुष्टि करनी होगी. पुष्टि होने पर सजा सुनाई जाती है. जब हम इस पर विचार करेंगे, तो संभवतः इसमें समय लगेगा. अगर आप तीन न्यायाधीशों के समक्ष मामले को भेजेंगे तो प्रभावी निर्णय होगा.’

11 दोषियों को हो फांसी
इसके बाद दोषियों की ओर से पेश वकीलों द्वारा और समय देने का अनुरोध करने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 13 फरवरी तक टाल दी. इस मामले में निचली अदालत ने 11 दोषियों को मृत्युदंड दिया था और 20 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने 31 आरोपियों को दोषी करार दिया और 11 दोषियों के मृत्युदंड को उम्रकैद में बदल दिया. राज्य ने जहां 11 दोषियों के मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के खिलाफ अपील की. वहीं, कई दोषियों ने मामले में उनकी सजा को बरकरार रखने के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है.

गुजरात हाईकोर्ट के अक्टूबर 2017 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई अपील दायर की गई हैं. हाईकोर्ट के इस फैसले में कई दोषियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया था और 11 लोगों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. गुजरात सरकार ने फरवरी 2023 में शीर्ष अदालत को बताया कि वह उन 11 दोषियों के लिए मृत्युदंड का अनुरोध करेगी, जिनकी सजा को उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास में बदल दिया था.

(With PTI inputs)

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Supreme Court hearing case on Godhra train incident on February 13 Gujarat government demands death penalty for 11 culprits
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'अब मामला नहीं होगा स्थगित...' गोधरा कांड पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी,
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'अब मामला नहीं होगा स्थगित...' गोधरा कांड पर SC की सख्त टिप्पणी, 11 दोषियों को फांसी देने की मांग

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