करीब दो महीने पहले की ही बात है जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन किया था. ममता ने इंडिया गठबंधन का नेतृत्व संभालने की इच्छा जताई थी और लालू ने इसके लिए हामी भरी थी. अब ममता का एक बयान ही लालू के लिए मुसीबत बन सकता है. दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन के नेतृत्व को लेकर ममता और लालू के रुख से आहत हुए कांग्रेस के लिए यह एक और मौका साबित हो सकता है. इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही कांग्रेस ममता के बयान के बहाने बिहारी अस्मिता का मुद्दा उठाकर लालू को भी बैकफुट पर धकेल सकती है.
क्या कहा ममता ने
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि भाजपा बंगाल में बिहारी लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ रही है. भाजपा ने यही काम महाराष्ट्र और दिल्ली में किया और सत्ता हासिल करने में सफल रही, लेकिन बंगाल में ऐसा संभव नहीं है. वे बंगाल में भाजपा की इस रणनीति को सफल नहीं होने देंगी.
एनडीए ने साधा निशाना
कहने को तो यह बयान बंगाली बनाम बाहरी से संबंधित है. ममता पहले भी ऐसे बयान देती रही हैं. बंगाल में अभी चुनाव नहीं हैं और ममता को इसका खास सियासी नुकसान होने की संभावना भी नहीं है, लेकिन फिलहाल इस बयान ने भाजपा और एनडीए को एक मौका दे दिया है. एनडीए के नेता इसे ममता के बिहार-विरोध के रूप में प्रचारित कर रहे हैं. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ममता बनर्जी ने कहा है कि ममता बनर्जी पहले भी अप्रत्यक्ष तरीके से बिहारी और बाहरी लोगों पर आरोप लगाती रही हैं. बंगाल के पिछले चुनाव के दौरान भी उन्होंने कहा था कि बड़ी तादाद में बिहार और यूपी के लोग उनके राज्य में आ गए हैं.
राजद के लिए मुश्किल
ममता ने यह बयान देकर बिहार में महागठबंधन की राजनीति को कठघरे में खड़ा कर दिया है. इसके जरिए जदयू और भाजपा के नेता महागठबंधन के नेताओं को बिहार-विरोधी बताकर इसे चुनावी हथियार बनाएंगे. लालू यादव का इसके लपेटे में आना तय है, क्योंकि उन्हें ममता का समर्थक माना जाता है. यदि लालू और तेजस्वी यादव खुलकर ममता के बयान का विरोध नहीं करते हैं तो उन्हें चुनाव में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है.
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कांग्रेस मारेगी मौके पर चौका
दूसरी ओर, ममता बनर्जी का ये बयान कांग्रेस के लिए बिहार में एक और मौका है. दिल्ली चुनाव में कांग्रेस ने ये इशारा कर दिया है कि वह राज्यों में अपनी अलग सियासत करना चाहती है. जरूरत हुई तो इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के खिलाफ चुनाव लड़ने से उसे परहेज नहीं है. हाल के दिनों में राहुल गांधी के लगातार बिहार दौरों ने यह भी बता दिया है कि कांग्रेस इस राज्य में अपनी अलग राजनीतिक जमीन तलाश रही है. जातीय जनगणना को फर्जी बताना हो या दिवंगत दलित नेता की प्रतिमा पर माल्यार्पण, राहुल ने राजद को भी इशारा कर दिया है कि वह चुनाव में अपने दम पर उतरने की रणनीति बना सकती है. ममता का बयान कांग्रेस को यह मौका दे सकता है. इसके बहाने वह लालू यादव को भी कटघरे में खड़ा कर सकती है. इसमें कोई संदेह नहीं कि लालू, कांग्रेस पर भाजपा की भाषा बोलने का आरोप लगाएंगे, लेकिन बिहार में अपने खोए वोट बैंक को पाने के लिए यह कीमत शायद ज्यादा नहीं होगी.
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Mamata Banerjee की बिहारी पॉलिटिक्स, Lalu Yadav के लिए झटका तो Rahul Gandhi के लिए साबित हो सकता है मौका