उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) इस वक्त अपने राजनीतिक जीवन में बहुत कठिन दौर से गुजर रहे है. पार्टी के दो फाड़ होने के बाद विधानसभा चुनाव (Maharashtra Election) में पार्टी की बुरी तरह से दुर्गति हुई है. अब शिवसेना (UBT) ने मुंबई और नागपुर नगर पालिका चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ने का फैसला किया. उद्धव ठाकरे के इस फैसले के पीछे राजनीतिक समीकरण और भविष्य की रणनीति को भी देखा जा रहा है. समझें आखिर किस वजह से अकेले चुनाव लड़ने के लिए मजबूर हुए शिवसेना सुप्रीमो.
2019 के बाद पहली बार अकेले लड़ेंगे उद्धव ठाकरे
महाराष्ट्र की राजनीति में इस वक्त कई सारी अटकलें लगाई जा रही हैं. इसमें उद्धव ठाकरे के वापस एनडीए (NDA) में जाने से लेकर एनसीपी के दोनों गुटों के फिर से एक होने के दावे भी शामिल हैं. 2019 में एनडीए से निकलकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना इंडिया अलायंस में शामिल हुई थी. यह पहला मौका है जब उद्धव की पार्टी अकेले ही चुनाव में उतरेगी.
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NDA में होंगे शामिल?
उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस दोनों ने कई बार कहा था कि अब उनके फिर से साथ आने की संभावना नहीं है. हालांकि, राजनीति में ऐसे बयान के बाद भी गठबंधन बनने की परंपरा रही है. कुछ दिन पहले ही शिवसेना के मुखपत्र सामना में देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की गई थी. अब बदलते समीकरणों में दावा किया जा रहा है कि शिवसेना के बचे हुए नेता और कार्यकर्ता भी बीजेपी के साथ जाने की बात कई बार दबी जुबान में कह चुके हैं. अब देखना है कि उद्धव क्या फैसला लेते हैं.
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