डीएनए हिंदी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बतौर प्रधानमंत्री 10वीं बार लाल किला से झंडा फहराएंगे और यहां से देश के नाम संबोधन भी करेंगे. देश के सबसे खास दिनों में से एक के आयोजन के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. इस बार फूलों से सजावट के साथ जी20 के प्रतीक भी लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के 1,800 लोगों को अतिथि बनने का न्योता मिला है. इनमें शिक्षक, नर्स, मजदूर से लेकर कुटीर उद्योग चलाने वाली महिलाएं भी शामिल हैं. इस समारोह में शीर्ष राजनीतिक हस्तियां, सैन्य अधिकारियों समेत कई वीवीआईपी गेस्ट हिस्सा लेते हैं. सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और हर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात रहेंगे.
लाल किले की सजावट और सुरक्षा व्यवस्था के लिए खास तैयारी
स्वतंत्रता दिवस 2023 के मौके पर लाल किले के सामने ज्ञान पथ को फूलों और जी-20 के प्रतीक चिह्न से सजाया गया है. इस बार की सजावट में जी-20 के चिह्न खास होंगे. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे तब 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी उनकी सुरक्षा के लिए तैनात होंगे. लाल किले पर 20,000 से ज्यादा मेहमान इस बार कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं जिसमें देश की शीर्ष हस्तियां भी शामिल हैं. इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. सुरक्षा के लिए स्नाइपर, कमांडो, पतंग पकड़ने वाले और शार्पशूटर तैनात किए गए हैं। राजघाट, आईटीओ और लाल किला जैसे इलाकों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू है.
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पुलिस ने कहा है कि लाल किले के आसपास अचूक सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है. वीवीआईपी गेस्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवाजाही पर नजर रखने से लेकर चेहरों को पहचानने और वीडियो वाले लगभग 1,000 कैमरे लगाए गए हैं. इस बार के कार्यक्रम में गांवों के सरपंच, नर्स, मछुआरे और सेंट्रल विस्टा परियोजना के निर्माण में लगे मजदूर भी विशेष तौर पर आमंत्रित किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस साल 20,000 से अधिक अधिकारी और नागरिक समारोह में हिस्सा लेंगे.
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लाल किले का ऐतिहासिक महत्व रहा है
भारत की आजादी के बाद से हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन लाल किले से ही होता है. भारत के आजाद होने के बाद 16 अगस्त 1947 की सुबह पंडित नेहरू ने लाल किले से तिरंगा फहराया था. उस रोज उस्ताद बिसमिल्लाह खान ने शहनाई वादन किया था. 1857 की क्रांति में भी लाल किला की भूमिका रही थी और आजादी के बाद इसी मुगलकालीन ऐतिहासिक इमारत से हर साल देश का झंडा पीएम और राष्ट्रपति फहराते हैं.
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