शादियों का सीजन चल रहा है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे है जहां पर शादी को लेकर अलग ही मान्यता है. ऐसा नहीं है कि केवल इसी शहर में शादी विवाह को लेकर अपनी अलग-अलग परंपराएं हैं बल्कि देश के हर कोने में हर क्षेत्र में शादी विवाह को लेकर अलग रीति-रिवाज होते है लेकिन आज हम आपको जिस परंपरा के बारे में बताने जा रहे है वह वाकई बहुत अनोखी है. इस परंपरा की चर्चा आज चारों तरफ हो रही है.
300 साल से निभाई जा रही है परंपरा
दरअसल इस परंपरा के अनुसार गाजे-बाजे के साथ दूल्हा बारात लेकर दुल्हन को ब्हाने जाता है, लेकिन लौटकर खाली हाथ आना पड़ता है यानी शादी के बाद दूल्हन घर नहीं आती. बीकानेर में धुलंडी के दिन एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें दूल्हा बारात लेकर लड़की के घर जाता है, लेकिन दुल्हन के बिना ही वापस लौट आता है. एक बात और ये परंपरा कोई नहीं बल्कि पूरे 300 साल पुरानी पंरपरा है जिसका पालन लोग आज भी करते हैं.
यह भी पढ़ें: कौन है Ranjani Srinivasan, जिसे Hamas से नाम जुड़ने पर करना पड़ा खुद को US से Self-Deport
क्या है इस बारत की विशेषता?
इस परंपरा के अनुसार हर्ष जाति का अविवाहित युवक विष्णु के रूप में दूल्हा बनकर बारात में शामिल होता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसा करने से दूल्हा बनने वाले युवक का एक साल के अंदर विवाह हो जाता है. शहर में ये परंपरा तीन शताब्दियों से मनाई जाती है. जिस रास्ते से ये बारात गुजरती है वहां का महौल विवाह जैसा बन जाता है. इस बारात की विशेषता ये है कि इसमें दूल्हा बिना दुल्हन के वापस लौटता है.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.
- Log in to post comments

bikaner wedding tradition
धूमधाम से जाती है बारात लेकिन बिना दुल्हन के ही लौट आता है दूल्हा, जानिए इस शहर की अनोखी परंपरा का राज