दिल्ली के जामिया नगर हिंसा मामले (Jamia Nagar Violence) में साकेत कोर्ट ने आरप तय कर दिए हैं. जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम (Sharjeel Imam) पर कोर्ट ने आरोप तय किए हैं. इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं. शिफा उर रहमानी समेत 15 अन्य लोगों को इस केस में बरी कर दिया गया है. कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील अस्वीकार करते हुए कहा कि ऐसे मामले में यह नहीं कहा जा सकता है कि दंगा भड़कने के पीछे आरोपी का भाषण जिम्मेदार नहीं है. इस हिंसा में समाज के सभी पक्ष के लोगों को नुकसान हुआ है और शहर के शांति व्यवस्था भी बाधित हुई थी. बता दें कि हिंसा से पहले शरजील इमाम ने भारत विरोधी भड़काऊ भाषण दिया था.
कोर्ट ने तय किए आरोप
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने शरजील इमाम के वकीलों की ओर से दी दलील को स्वीकार नहीं किया. बचाव पक्ष की दलील थी कि शरजील के भाषणों की वजह से हिंसा नहीं भड़की थी और भीड़ पहले से ही सड़कों पर थी. कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि आरोपी के भाषणों का कोई असर नहीं था. कोर्ट ने पूर्व जेएनयू छात्र को हिंसा का मास्टरमाइंड बताते हुए कहा कि आरोपी का भाषण क्रोध और घृणा स भड़ा था. इसने लोगों को भड़काने का काम किया जिसकी वजह से सार्वजनिक सड़कों पर गैरकानूनी सभाएं हुईं और इनमें शामिल लोगों की ओर से व्यापक तौर पर हिंसा हुई.
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कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कहा कि शरजील इमाम ने न सिर्फ घृणा से भड़ा हुआ भाषण दिया, बल्कि इस हिंसा को भड़काने वाला मास्टरमाइंड भी था. इसने सिर्फ एक समुदाय के लोगों को चक्का जाम करने के लिए उकसाया, जिसका नुकसान समाज के हर समुदाय के लोगों को झेलना पड़ा था. कोर्ट ने यह भी माना कि शरजील के दिए भाषणों की वजह से देश के दूसरे हिस्सों में भी व्यापक हिंसा का माहौल तैयार हुआ.
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शरजील इमाम पर आरोप तय
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