Delhi Election 2025: दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर अब महज कुछ ही दिन बचे हुए हैं. इसको लेकर सभी पार्टियों की तरफ से खूब सारी तैयारीयाँ हो रही हैं. सभी दल जानता को रिझाने के लिए पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं. लगातार रैलियां और जनसभाएँ की जा रही हैं. बड़े-बड़े दावे और वादें किए जा रहे हैं. सभी तबकों को साधने की कोशिश की जा रही है. इसी क्रम में दिल्ली में मौजूद एक बड़े पूर्वांचली तबके को भी साधा जा रहा है. ये तबका इस समय बड़ी तादाद की साथ दिल्ली में मौजूद हैं. आइए जानते हैं दिल्ली की चुनावी राजनीति में कितना ताकतवर है ये तबका.
पूर्वांचली वोटर्स क्यों है इतने अहम
पूर्वांचली वोटर्स का मतलब है, वो वोटर्स जो मूल रूप से पूर्वी यूपी और बिहार से हैं. पिछले एक दशक से इन वोटर्स का साथ विधानसभा के चुनावों में बड़ी संख्या के साथ आप पार्टी को मिल रहा है. वहीं लोकसभा के समय इनका बड़ा समर्थन बीजेपी को हासिल होता रहा है. सियासी पार्टियों से संबंधित डेटा के मुताबिक दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 25 से 30% है. इनकी ताकत सबसे ज्यादा दिल्ली के पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में है. वहां की कुछ सीटों में तो इनकी तादाद 35% से भी अधिक कही जा रही है.
पूर्वांचली बाहुल्य सीटें
पूर्वांचली मतदाताओं की बात करें तो इसकी सबसी बड़ी संख्या त्रिलोकपुरी सीट पर बताई जाती है. जहां ये 35% से ज्यादा संख्या के साथ मौजूद हैं. इसके बाद नांगलोई जाट सीट पर ये करीब 30% आबादी के साथ मौजूद हैं. लक्ष्मीनगर सीट पर ये करीब 30% हैं. उत्तम नगर सीट पर इनकी संख्या लगभग 30% के साथ मौजूद है. वहीं किराड़ी सीट पर भी ये लगभग 30% के साथ उपस्थित हैं. घोंडा सीट पर ये लगभग 29% संख्या के साथ मौजूद हैं. वहीं कृष्णानगर सीट पर ये लगभग 29% के संख्याबल के साथ हैं. विकासपुरी सीट पर इनकी संख्या 28% मौजूद है. बुराड़ी में 27% आबादी के साथ उपस्थित हैं. वहीं बादली में 26% आबादी इनकी है.
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भारतीय मतदाता (सांकेतिक तस्वीर)
Delhi Election: दिल्ली की इन सीटों पर पूर्वांचली वोटर्स हैं ताकतवर, इस बार क्यों बढ़ी अहमियत