1991 में भारत एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था. विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटने के कारण देश के पास आयात-निर्यात का संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे. ऐसे समय में, तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया. यह ऐतिहासिक बजट 24 जुलाई 1991 को पेश किया गया जो कि न केवल भारत की वित्तीय स्थिति को ठीक करने में मददगार था, बल्कि इसने देश को आर्थिक उदारीकरण की दिशा में भी आगे बढ़ाया.
आर्थिक उदारीकरण की दिशा में कदम
मनमोहन सिंह ने इस बजट में लाइसेंस राज को समाप्त कर दिया, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली. इसके साथ ही, विदेशी निवेशकों के लिए दरवाजे खोले गए और आयात-निर्यात नीति में भी बदलाव किए गए. सबसे महत्वपूर्ण कदम था सीमा शुल्क को 220 फीसदी से घटाकर 150 फीसदी करना, जिससे भारत में विदेशी निवेश के लिए माहौल बन सका. इसके परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई और भारतीय रुपये की स्थिति स्थिर हुई.
निर्मला सीतारमण के रिकॉर्ड पर नजर
आज के समय में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बजट पेश करने के रिकॉर्ड बनाए हैं. वह लगातार आठवीं बार देश का बजट पेश करने वाली पहली महिला वित्त मंत्री बनी हैं. उनके नाम एक और अहम रिकॉर्ड है, जब उन्होंने 2020 में सबसे लंबा बजट भाषण दिया, जो 2 घंटे 42 मिनट तक चला.
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'युगांतकारी' बजट
1991 का बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक 'युगांतकारी' पल साबित हुआ. डॉ. मनमोहन सिंह के इस बजट ने न केवल देश की आर्थिक दिशा बदल दी, बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था में देखे जा सकते हैं. यह बजट भारत को एक नई राह पर ले जाने वाला साबित हुआ, जिसके परिणामस्वरूप देश ने अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने में सफलता हासिल की.
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