Bhopal Gas Tragedy: मध्य प्रदेश के पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें हजारों लोग सड़कों पर उतर गए. प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. यह विरोध 337 टन जहरीले कचरे को इंदौर के पास पीथमपुर स्थित एक इंडस्ट्रियल वेस्ट डिपोजिट यूनिट में लाए जाने के बाद शुरू हुआ.
सीलबंद कंटेनरों में लाया गया था कचरा
यह जहरीला कचरा ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के तहत 12 सीलबंद ट्रकों में कड़ी सुरक्षा के बीच भोपाल से करीब 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर लाया गया. कचरे के पहुंचने के बाद स्थानीय नागरिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया. 1.75 लाख की आबादी वाले पीथमपुर में इस मुद्दे पर बंद का आह्वान किया गया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कचरे को पीथमपुर में नष्ट करने से इंसानों और पर्यावरण पर खतरनाक असर पड़ सकता है. 30 किलोमीटर दूर स्थित इंदौर के नागरिक भी इस कचरे को जलाए जाने का विरोध कर रहे हैं. हालांकि, सरकार ने कचरे के सुरक्षित निपटान का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारी इस कचरे को कहीं और भेजने की मांग कर रहे हैं.
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हाई कोर्ट का आदेश
भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर को आदेश दिया था कि यूनियन कार्बाइड कारखाने का जहरीला कचरा 4 हफ्तों के भीतर हटाया जाए. कोर्ट ने निर्देश का पालन न होने पर अवमानना की चेतावनी भी दी थी. 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड के कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस के रिसाव के कारण हजारों लोग मारे गए थे और कई अपंग हो गए थे. त्रासदी के बाद कारखाने में जमा हुआ जहरीला कचरा दशकों से विवाद का कारण बना हुआ है.
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यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचड़ा पीथमपुर पहंचते ही बवाल, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने चटकाई लाठी, जानें पूरा मामला