फिल्म छावा ने औरंगजेब पर बहस को फिर से शुरू करने में अहम भूमिका निभाई है. फिल्म में औरंगजेब के खिलाफ संभाजी महाराज के वीरतापूर्ण संघर्ष, हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए उनके अटूट समर्पण और मुगल सम्राट के हाथों उनकी क्रूर हत्या को दिखाया गया है. इस भवनात्मक कहानी को देख दर्शकों के बीच मराठा गौरव की भावना जागी, खासकर महाराष्ट्र में, जहां संभाजी महाराज को एक ऐसे योद्धा के रूप में सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया. फिल्म में दिखाया गया कि औरंगजेब ने संभाजी महाराज के साथ क्रूरता की और जबरन धर्म परिवर्तन कराने और फिर उन्हें फांसी पर चढ़ाने का प्रयास किया. जिसे देक दर्शक भड़क गए. इसके बाद हिंदू राष्ट्रवादी समूहों ने औरंगजेब की कब्र को तोड़ने की मांग कर डाली.

क्रूर शासक औरंगजेब की कब्र तोड़नो को लेकर विवाद 

कोल्हापुर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हाल ही में एक प्रदर्शन किया, जिसमें प्रतीकात्मक रूप से औरंगजेब के मकबरे की प्रतिकृति को हथौड़ों से तोड़ दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपकर ऐतिहासिक संरचना को हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की है. हिंदू समूहों का तर्क है कि औरंगजेब भारतीय इतिहास का सबसे अत्याचारी शासकों में से एक था, जिसने मंदिरों को तुड़वाया, जबरन धर्मांतरण और मराठा योद्धाओं की हत्याएं कराईं. उनका मानना ​​है कि उसकी कब्र को संरक्षित करना महाराष्ट्र के समृद्ध इतिहास और मराठों के बलिदान का अपमान है. 

राजनीतिक दलों ने दी प्रतिक्रिया 

इस विवाद ने महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों को विभाजित कर दिया है. भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने औरंगजेब की समाधि को हटाने की मांग का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस और एनसीपी इसका विरोध कर रही है. उन्होंने इसे महंगाई, बेरोजगारी और शासन जैसे वास्तविक मुद्दों से राजनीतिक ध्यान भटकाने वाला कदम बताया है. शिवसेना यूबीटी के संजय राउत ने कहा, "शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज ने औरंगजेब को हराया था. यहां उनकी समाधि उनकी सफलता का नहीं, बल्कि उनकी विफलता का प्रतीक है. भाजपा लोगों की वास्तविक चिंताओं को दूर करने के बजाय इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए उपयोग कर रही है. अगर सरकार ने उन्हें कार्रवाई करने से रोका है, तो विरोध प्रदर्शन की क्या जरूरत है. प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री अधिसूचना जारी कर उस समाधि को हटा सकते हैं. उन्हें यह नाटक बंद कर देना चाहिए और समझना चाहिए कि शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद औरंगजेब ने अगले 25 वर्षों तक लड़ाई लड़ी, लेकिन मराठों को नहीं हरा सके. यह समाधि उनकी विफलता का प्रतीक है."

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सीएम फडणवीस ने क्या कहा

इस बीच, सीएम फडणवीस ने कहा, "अगर महाराष्ट्र किसी का महिमामंडन करता है, तो वह छत्रपति शिवाजी महाराज होंगे, औरंगजेब नहीं, हमें ऐसे शासक की समाधि की जरूरत नहीं है, जिसने हिंदुओं पर अत्याचार किया और हमारे प्रिय छत्रपति संभाजी महाराज को मार डाला. अगर कोई औरंगजेब का महिमामंडन करने की कोशिश करता है, तो हम ऐसे प्रयासों को तुरंत कुचल देंगे." 

भाजपा नेता ने कही ये बात 

भाजपा नेता राम कदम ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा, "औरंगजेब एक क्रूर शासक था. महाराष्ट्र में उसकी कब्र के लिए कोई जगह नहीं है. जो लोग उसका महिमामंडन करना चाहते हैं, उन्हें दो बार सोचना चाहिए. इसे हटाने की मांग जायज है."

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Aurangzeb tomb became the hot topic of Maharashtra politics chhaava movie people reactions reason of violence
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Chhaava के असर से भड़का औरंगजेब की कब्र का मुद्दा, भावनाओं से खेलकर अपनी गोटी
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Chhaava के असर से भड़का औरंगजेब की कब्र का मुद्दा, भावनाओं से खेलकर अपनी गोटी लाल कर रहीं सियासी पार्टियां?

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विकी कौशल की फिल्म छावा में दिखाया गया कि कैसे औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज को कैद कर उन्हें प्रताड़ित किया था. लेकिन अब ये मूवी विवादों का कारण बनती नजर आ रही है.