पूरे देश में औरंगजेब के नाम पर बवाल मचा है. महाराष्ट्र के खुल्दाबाद में मौजूद औरंगजेब की कब्र को वहां से हटाने के लिए हिंदूवादी संगठन लगातार दबाव बना रहे हैं. इन सबके बीच कोई ये सुध नहीं ले रहा कि औरंगजेब के वंशज फिलहाल कहां और किस हाल में हैं. एक दौर था जब करीब-करीब पूरे भारत और उसके बाहर भी मुगल साम्राज्य का शासन था. मुगलों के वंशज आलीशान महलों में रहते थे, लेकिन आज मुफल्लिसी की जिंदगी जी रहे हैं. उन्हें नाम मात्र की सरकारी पेंशन मिलती है जो परिवार का पेट भरने के लिए भी काफी नहीं है.
बीबीसी से बातचीत में आखिरी मुगल शासक बहादुरशाह जफर की पौत्रवधू सुल्ताना बेगम ने अपने परिवार की हालत के बारे में बताया. बातचीत करते हुए जब भी पुराने दिनों की बातें होतीं, सुल्ताना बेगम की आंखें चमक उठतीं. ऐसा लगता जैसे वे पुराने दौर में लौट जाना चाहती हैं. लेकिन जैसे ही मौजूदा हालात की चर्चा होती, उनके मुंह से जैसे शब्द निकल ही नहीं पाते.
झुग्गी में रहता है परिवार
सुल्ताना बेगम के पति राजकुमार मिर्जा बेदर दख्त की 1980 में मौत हो गई थी. इसके बाद से वो पश्चिम बंगाल में कोलकाता के पास हावड़ा में एक झुग्गी में रहती हैं. दो कमरों के उनके घर में न तो किचन है, न ही पानी का कनेक्शन. बातचीत में सुल्ताना बेगम कहती हैं कि उन्हें बहादुरशाह जफर का घर चाहिए. हुकूमत में थोड़ी भी गैरत हो तो उन्हें वो घर दे, लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि हुकूमत बेगैरत है.
नेहरू जी ने शुरू की पेंशन
सुल्ताना बेगम को सरकार की ओर से हर महीने छह हजार रुपये पेंशन मिलती है. उन्होंने बताया कि सरकारी पेंशन की शुरुआत 1960 में हुई. तब प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू ने उनके लिए 250 रु मासिक पेंशन का इंतजाम किया था. एक शहंशाह के परिवार के लिए यह रकम काफी कम थी. परिवार का पेट भरने के लिए सुल्ताना बेगम छोटे-मोटे काम करती थीं.
फूल की टोकरी में भारत आए थे मिर्जा
सुल्ताना बेगम के पति मिर्जा बेदार बख्त का जन्म 1920 में हुआ था. तब तक भारत में मुगलों का शासन खत्म हो चुका था. अंग्रेजों ने मुगलों को रंगून भेज दिया था. अंग्रेज शासकों ने मिर्जा के रहने के लिए घर, नौकर-चाकर और बग्घी दी थी, लेकिन भारत नहीं आने की नसीहत भी दी थी. मिर्जा के नाना उन्होंने फूलों की टोकड़ी में छिपाकर भारत लेकर आए. नाना ने ही उन्हें कुश्ती और हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया था.
निकाह का किस्सा भी बताया
लखनऊ में पैदा हुई सुल्ताना बेगम ने अपनी निकाह का किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि वे एक दिन खेल रही थीं. अचानक घर के लोगों ने उन्हें कपड़े बदलने को दिए. उन्होंने खुशी-खुशी कपड़े बदल लिए. फिर उन्हें बैठने को कहा गया. सुल्ताना ने देखा कि उनकी अम्मी रो रही थीं. तब उन्होंने पूछा कि क्या हो रहा है. लोगों ने कहा चुपचाप बैठी रहो और एक बार हां बोल दो. सुल्ताना ने हां बोला और उनका निकाह हो गया.
'क्या करें, भीख भी नहीं मांग सकते'
सुल्ताना बेगम कहती हैं कि 2010 में उनकी पेंशन बढ़ाकर छह हजार रुपये कर दी गई, लेकिन उनके खर्च पूरे नहीं होते. वे कभी साड़ी बनाने का काम करती हैं, कभी चाय या स्क्रैप की दुकान खोलती हैं, लेकिन कभी किसी से कुछ मांगती नहीं. एक शहंशाह के वंशज भला भीख कैसे मांग सकते हैं. कुछ साल पहले उन्होंने दिल्ली के लाल किले पर दावा ठोकते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. वे पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से भी मिल चुकी हैं, लेकिन खास फायदा नहीं हुआ. वे अब भी एक ही बात कहती हैं, हुकूमत को थोड़ी गैरत तो आए.
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