World Homeopathy Day 2025: आयुर्वेदिक और एलोपैथी इलाज के बीच होम्योपैथी भी तेजी से अपनी जगह बना रही है. वैश्विक स्तर पर 'सौम्य उपचार प्रणाली' के तौर पर मान्यता हासिल कर चुकी होम्योपैथी को पसंद करने वाले भारत में भी अब हर गली-नुक्कड़ में मिल जाएंगे. इसके बावजूद इलाज की इस विधा को लेकर कई तरह के मिथक आज भी जनता के मन में मौजूद हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के आयुष मंत्रालय ने इन मिथकों को दूर करने के लिए होम्योपैथी से जुड़ा ऐसा आयोजन करने की तैयारी की है, जिसे आज तक का अपनी तरह का सबसे बड़ा जमावड़ा माना जा रहा है. होम्योपैथी के संस्थापक कहलाने वाले जर्मन डॉ. सैम्युअल हैनिमैन की 10 अप्रैल को जयंती के मौके पर आयुष मंत्रालय की तरफ से केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) और राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (NIH) ने यह आयोजन कराने की तैयारी की है. यह दिन विश्व होम्योपैथी दिवस (World Homeopathy Day) के तौर पर मनाया जाता है.
दो दिन चलेगा आयोजन
आयुष मंत्रालय के इस आयोजन के तहत 10 और 11 अप्रैल को दो दिवसीय होम्योपैथी संगोष्ठी आयोजित की जा रही है. यह आयोजन गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर कन्वेंशन और एक्जीबिशन सेंटर में होगा. इस संगोष्ठी में देश-विदेश के नामी होम्योपैथी चिकित्सकों के अलावा इसकी दवा बनाने वाली कंपनियां और रिसर्चर्स मौजूद होंगे. शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित मीडिया वार्ता में CCRH, NIH, NCH के साथ ही आयुष मंत्रालय के एक्सपर्ट्स ने इस आयोजन के बारे में जानकारी दी, जिसमें होम्योपैथी की शिक्षा प्रणाली और संस्थागत योगदान सहित विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई. अब तक के सबसे बड़ी होम्योपैथी संगोष्ठी से रिसर्च की नवीनतम प्रगति, इसके अनुप्रयोग, प्रभाव और उद्योग से जुड़े विषयों तक सभी को सुगम पहुंच मिलने का दावा किया गया है, जिससे यह संगोष्ठी शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के अलावा नीति-निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों को भी एक साझा मंच देगी.
सबसे बड़ी होम्योपैथी प्रदर्शनी का भी होगा आयोजन
इस संगोष्ठी के साथ ही होम्योपैथी उद्योग की अब तक की सबसे बड़ी प्रदर्शनी और राष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी 'लाइव मटेरिया मेडिका' प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी. मीडिया वार्ता में सभी एक्सपर्ट्स ने एकमत से स्वीकार किया कि भारत पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का वैश्विक अग्रदूत बन चुका है. NCH होम्योपैथी की मानकीकृत शिक्षा और कौशल विकास को सुनिश्चित कर रहा है, जबकि CCRH एडवांस रिसर्च और व्यावहारिक अनुप्रयोग को बढ़ावा देने में जुटा हुआ है. NIH भविष्य के होम्योपैथिक चिकित्सकों को व्यवस्थित शैक्षणिक प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर रहा है.
10,000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स के आने की उम्मीद
CCRH के महानिदेशक, डॉ. सुभाष कौशिक ने कहा, 'यह अब तक का सबसे बड़ा होम्योपैथी सम्मेलन होगा, जिसमें दुनिया भर से 10,000 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है. यह आयोजन होम्योपैथी के भविष्य को आगे बढ़ाने, सहयोग करने और इसे वैश्विक स्तर पर सशक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा. इस बार विश्व होम्योपैथी दिवस का विषय अध्ययन, अध्यापन व अनुसंधान है, जो होम्योपैथी की तीन प्रमुख संस्थाओं NCH, NIH और CCRH के संयुक्त प्रयासों को दर्शाता है. ये तीनों संगठन होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली के इन तीन स्तंभों की देखरेख कर रहे हैं.' NCH के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. पिनाकिन एन. त्रिवेदी ने कहा, 'इस बार का विश्व होम्योपैथी दिवस शिक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े प्रतिनिधित्व का गवाह बनने वाला है.' पिछले साल विश्व होम्योपैथी दिवस 2024 का आयोजन नई दिल्ली में किया गया था, जिसमें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शामिल हुए थे. शुक्रवार को मीडिया वार्ता में डॉ. संगीता दुग्गल (सलाहकार, होम्योपैथी, आयुष मंत्रालय), डॉ. प्रलय शर्मा (निदेशक, NIH), डॉ. सुभाष कौशिक (महानिदेशक, CCRH), डॉ. पिनाकिन एन. त्रिवेदी (कार्यवाहक अध्यक्ष, NCH) और डॉ. तर्केश्वर जैन (अध्यक्ष, होम्योपैथी शिक्षा बोर्ड) सहित अन्य विशेषज्ञों ने भाग लिया.
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होम्योपैथी से जुड़े सारे भ्रम दूर करेगा आयुष मंत्रालय, अब तक के सबसे बड़े आयोजन में जुटेंगे एक्सपर्ट्स