प्रेग्नेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद भी अक्सर महिलाओं को कई तरह की गंभीर समस्याओं का (Twince Baby Mother) सामना करना पड़ता है. हाल में आई एक नई रिसर्च के मुताबिक जिन महिलाओं के जुड़वां बच्चे होते हैं, उन्हें एक बच्चा होने वाली महिलाओं के मुकाबले दिल की बीमारी (Heart Disease) होने का जोखिम ज्यादा होता है. इतना ही नहीं जुड़वां बच्चों की मां को डिलीवरी के एक साल के अंदर ही दिल की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है. आइए जानते हैं क्या कहती है रिसर्च और क्यों अन्य महिलाओं की तुलना में (Heart Disease In Twince Mother) जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं में दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम अधिक होता है... 

क्या कहती है रिसर्च?
बता दें कि यह रिसर्च यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित हुई है, जिसमें यह भी बताया गया है कि पिछले कुछ दशकों में जुड़वां गर्भधारण के मामले बढ़े हैं, जिसके पीछे का बड़ा कारण फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और ज्यादा उम्र में मां बनना है. स्टडी के मुताबिक अगर जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली महिला को गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर यानी प्री-एक्लेम्पसिया की समस्या होती है, तो ऐसी स्थिति में हार्ट डिजीज का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. 

क्या है इसके पीछे का कारण? 
एक्सपर्ट के मुताबिक जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं के हार्ट को गर्भावस्था के दौरान ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिसके कारण डिलीवरी होने के बाद हार्ट को नॉर्मल कंडीशन में लौटने में काफी लंबी वक्त लगता है. यही वजह है कि इनमें दिल से जुड़ी बीमारियों का रिस्क भी बढ़ जाता है. 

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अध्ययन के मुताबिक, जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी की समस्या नहीं थी, तो भी मां बनने पर हार्ट डिजीज के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना जुड़वां बच्चों की मां की सामान्य महिलाओं की तुलना में दोगुनी थी.

क्या है एक्सपर्ट की सलाह 
जुडवां प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अगर हाई ब्लड प्रेशर था, तो उनमें हार्ट डिजीज का खतरा आठ गुना बढ़ गया. ऐसे में एक्सपर्ट्स ने फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से गुजरने वाली महिलाओं को इस बात का खास ध्यान रखने की सलाह दी है. इसके लिए खासतौर से अधिक उम्र, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट डिजीज से पीड़ित महिलाओं को जुड़वां गर्भावस्था को लेकर जागरूक करना जरूरी है. 

वहीं डॉक्टर्स को इन महिलाओं की प्रसव के बाद एक साल तक नियमित जांच करनी चाहिए, ताकि किसी भी हार्ट प्रॉब्लम का समय पर पता लगाया जा सके और समय रहते सही इलाज किया जा सके.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट्स से संपर्क करें.)

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mothers of twins baby face higher risk of heart disease new research reveals about twin pregnancy risk of twin pregnancy
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क्या जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं में ज्यादा होता है Heart का खतरा?
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क्या जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं में ज्यादा होता है Heart Disease का जोखिम?

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